3 + Short Motivational Story in Hindi Language / 3 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां

3 + Short Motivational Story in Hindi Language / 3 प्रेरणादायक हिंदी कहानियां

Short Motivational Story in Hindi मित्रों इस पोस्ट में Short Motivational Story in Hindi With Moral की 5 कहानियां दी गयी हैं।  सभी बहुत ही प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद हैं।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

Short Motivational Story in Hindi Image ( शार्ट मोटिवेशनल स्टोरी इन हिंदी विथ मोरल )

 

 

 

 

 

1- मित्रों जीवन में कितनी भी दिक्कत क्यों ना आये, हार ना मानो।  लड़ो आखिरी दम तक लड़ो।  आपकी इस जिद के आगे प्रकृति को भी झुकना ही होगा और आपको सफलता निश्चित ही मिलेगी। 

 

 

 

 

 

सोहनपुर गांव में राधा नाम की एक औरत अपने पति सुखराज के साथ रहती थी। इन दोनों को कोई संतान नहीं थी। कुछ समय के उपरांत सुखराज बीमार हो गया।

 

 

 

 

शिक्षाप्रद हिंदी कहानियां 

 

 

 

 

 

सुखराज के इलाज में राधा ने कोई कमी नहीं की।  उसने अपने सभी गहने तक बेच डाले उसका पूरा खेत बिक गया, फिर भी सुखराज के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। उसका स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन गिरता ही गया।

 

 

 

 

 

राधा ने हार नहीं मानी।  उसने अपने सभी जानवर बेच दिए और उसका भी पैसा सुखराज के इलाज करने में लगा दिया, लेकिन नियति को तो कुछ और ही मंजूर था। सुखराज ने राधा को जीवन के सफर में अकेला छोड़कर चला गया।

 

 

 

 

 

अब राधा के पास जीवन यापन के लिए कुछ भी शेष न था, लेकिन जीवन तो गुजारना ही था। राधा ने एक धनी किसान से कर्ज लेकर एक गाय खरीद लाई और उसके दूध को बेचकर अपना जीवन निर्वाह करने लगी। लेकिन नियति अभी भी राधा से रुष्ट थी। फलतः गाय भी एक दिन बीमार पड़ी, राधा के सेवा के बाद भी गाय ने उसका साथ छोड़ दिया, अर्थात गाय की मौत हो चुकी थी।

 

 

 

 

 

 

अब राधा के सामने जीवन यापन का यक्ष प्रश्न था, लेकिन राधा ने हार नहीं मानी। उसके पड़ोसन के पास एक गाय थी।  राधा ने अपने पड़ोसन से गाय का गोबर माँगा। पड़ोसन ने कहा, “हमें कोई आपत्ति नहीं है तुम गोबर ले जाया करो।”

 

 

 

 

 

 

राधा पड़ोसन के घर से गाय का गोबर लाकर उसका उपला बनाना शुरू किया और उस उपले को बेचकर जीवन यापन करने लगी।

 

 

 

 

 

यह देखकर राधा के पड़ोसन को ईर्ष्या होने लगी और वह अपने गाय को घर के अंदर बांधना शुरू कर दिया। अब राधा को गाय का गोबर भी मिलना बंद हो गया और पैसे देने वाले भी अपने कर्ज के लिए उसे परेशान करने लगा था, जिसके पास से कर्ज लेकर राधा ने गाय खरीदी थी और गाय की मृत्यु हो जाने के कारण उसका कर्ज नहीं चुका पाई थी।

 

 

 

 

 

 

लेकिन उसने युक्ति से काम लिया। अब वह गांव के दूसरे धनी किसान के पास गई उसके पास ढेर सारी गाये थी। राधा ने उससे गाय का गोबर देने के लिए प्रार्थना की।

 

 

 

 

 

किसान ने कहा, “ठीक है, गोबर ले जाया करो।” लेकिन तुम्हे गोबर ले जाने के लिए रोज आना पड़ेगा इसलिए मैं तुम्हे एक गाय ही दे देता हूँ।”

 

 

 

 

 

किसान ने विचार किया कि मैं इसे गाय दे देता हूँ क्योंकि एक गाय हमारे पास हमेशा ही बीमार रहती है तो वही गाय मैं राधा को दे देता हूँ। जिससे हमारी भी बला टल जाएगीऔर राधा के ऊपर हमारा उपकार भी हो जाएगा। इसलिए किसान ने राधा को वह बीमार गाय दे दी।

 

 

 

 

 

 

राधा गाय लेकर अपने घर आई और उस गाय की खूब सेवा करने लगी। गाय बीमार होने की वजह से दूध भी कम देती थी। एक दिन की बात है एक संत पुरुष उधर से जा रहे थे। उन्होंने राधा से कहा, “मैं बहुत भूखा हूँ,  हमें कुछ खाने को दे दो तो हमारी क्षुधा तृप्त हो जाय।”

 

 

 

 

 

 

” आप बैठिए महाराज, मैं आपके लिए भोजन लेकर आती हूँ। ” राधा ने कहा। राधा ने संत पुरुष को भोजन दिया और पुनः उनके लिए पानी लाने चली गई।

 

 

 

 

 

उस संत ने अपने ज्ञान से देखा कि राधा अपना पूरा भोजन उन्हें अर्पण कर दिया है। तब तक राधा ने पानी लाया। संत पुरुष ने भोजन से तृप्त होकर उस गाय के ऊपर हाथ फेरा और चले गए। इसके उपरांत गाय में बहुत परिवर्तन हुआ।

 

 

 

 

 

गाय की बीमारी ठीक हो गई और वह सोने का गोबर देने लगी। यह दृश्य राधा की पड़ोसन ने देखा तो उससे रहा नहीं गया। वह अपने गाय का गोबर राधा के गाय के पास रख देती और राधा के गाय का सोने का गोबर अपने घर में ले आती। राधा को शक न हो इसलिए वह राधा से मीठी – मीठी बातें करती।

 

 

 

 

एक दिन राधा ने अपने गाय को घर के अंदर बांध दिया तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न था, क्योंकि गाय ने सोने का गोबर दिया था। राधा ने सोने का गोबर बेचकर पहले वाले धनी किसान का कर्ज चुका दिया। अब राधा की पड़ोसन को सोने का गोबर मिलना बंद हो गया तो वह उस किसान के पास गई जिसने राधा को गाय दी थी।

 

 

 

 

 

राधा की पड़ोसन ने किसान से कहा, “आपने जो गाय राधा को दी है, वह सोने का गोबर देती है। अगर आप अपनी गाय राधा के पास से लेकर आएगे तो वह आपके पास भी सोने का गोबर देगी और आप बहुत ही धनी हो जाएगे।” यह सुनकर किसान के मन में लालच आ गया और वह राधा के पास से अपनी गाय को ले आया लेकिन किसान के घर आते ही गाय ने पुनः गोबर देना शुरू कर दिया।

 

 

 

 

एक दिन किसान ने देखा उसके सारे घर में गाय के गोबर की गंदगी बिखरी हुई है। वह बहुत परेशान हो गया। उसे दूसरे दिन रात्रि के समय स्वप्न आया।

 

 

 

 

 

स्वप्न में कोई उससे कह रहा था, ” यह गाय राधा को लौटा दो नहीं तो इसी तरह तुम्हारे घर में हमेशा गाय के गोबर की गन्दगी बिखरी रहेगी।”

 

 

 

 

 

सुबह होते ही किसान ने पुनः गाय को राधा घर पहुंचा दिया। राधा के घर आते ही गाय ने पुनः सोने का गोबर देने लगी और किसान के घर से गोबर की गंदगी साफ हो चुकी थी।

 

 

 

 

 

Short Motivational Story in Hindi Writing अन्नपूर्णा हिंदी कहानी 

 

 

 

 

Short Motivational Story in Hindi
Short Motivational Story in Hindi

 

 

 

2 – मित्रों जीवन में कुछ ऐसा कर जाओ कि यह दुनिया याद रखे। पैदा हुए और मर गए, यह भी कोई जिंदगी है। मानव जीवन मिला है, तो सदुपयोग करो। आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

80 वर्ष की उम्र में प्रायः लोग शिथिल हो जाते है, लेकिन ललिता दादी की सक्रियता एक जीती – जागती मिसाल थी। ललिता दादी अकेली थी लेकिन अपना जीवन समाज को समर्पित कर दिया था।

 

 

 

 

 

उनका रोज का नियम था, कि रात्रि विश्राम के पहले अपने गांव का एक चक्कर जरूर लगाती थी और प्रयास करती थी, कि कोई भी परिवार भूखा न सोए।

 

 

 

 

एक बार किशन का परिवार और उसके बच्चे भूख से बिलख रहे थे, तब ललिता दादी ने किशन को 15 दिन का राशन और आर्थिक सहायता भी दिया था। तभी से गांव वालों ने उनका नाम अन्नपूर्णा रख दिया।

 

 

 

 

सीख – जीवन में कुछ ऐसा काम करो कि लोग हमेशा याद करे।

 

 

 

 

प्रयास हिंदी प्रेरणादायक कहानी 

 

 

 

 

3- अगर हमारे छोटे से अच्छे प्रयास के कारण समाज या देश का भला हो जाय तो उस कार्य को अवश्य ही करना चाहिए। जिस प्रकार सारे संसार की भलाई के लिए मुनि दधीच  ने अपने हड्डियों का दान के लिए अपने प्राण त्याग कर दिए थे।

 

 

 

 

किशनपुर गांव में एक आश्रम बनाकर उसमे एक महात्मा जी निवास करते थे, उनके पास एक डमरू था। जब भी उनका हृदय आनंदित होता उसी समय वह अपना डमरू बजने लगते।  उनका मन मयूर नाचने लगते और उनके ऐसा करने से खूब बारिश होती।

 

 

 

 

 

एक बार किशनपुर में बरसात नहीं हुई।  किसानों को पानी की अतिआवश्यकता थी। अचानक एक आदमी को उपाय सूझा।  उसने गांव वालों से कहा, “हमें महात्मा जी को खुश करना होगा। महात्मा जी जब खुश होते है तभी डमरू बजाते है और जब डमरू की आवाज होती है तभी बारिश होती है।”

 

 

 

 

 

फिर गांव के कुछ आदमी ने एक दुधमुँहे बच्चे को महात्मा जी के पास ले गए। बालक तो बालक ही था और नादान भी था। वह अपने चंचल स्वभाव के कारण कभी महात्मा जी की लंबी उलझी जटाओं से खेलता कभी उनकी दाढ़ी को हिलाने का प्रयास करता कभी डमरू बजाने का असफल प्रयास करता था।

 

 

 

 

 

उसकी बाल सुलभ अदा देखकर महात्मा का भी मन बालक बन गया, वह भी बालक के साथ विनोद करने लगे। उनके हाथ में डमरू था और डमरू से मधुर ध्वनि उत्पन्न हो रही थी। सभी लोगों ने देखा कि काले मेघ के साथ बारिश होने लगी। सभी लोग बहुत खुश थे।

 

 

 

 

तभी एक किसान ने कहा, ” महात्मा जी यह कैसा चमत्कार है ? आपके डमरू के ध्वनि से बारिश होती है।

 

 

 

 

इसपर महात्मा जी ने कहा, ” यह कोई चमत्कार नहीं है।  मैं तो बस अपना कर्तव्य पूरा करता हूँ।  बाकी सब ऊपर वाले के हाथ में हैं।  मैं तब तक डमरू बजाना नहीं रोकता, जब तक बारिश ना हो जाए।  ”

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – सच्ची मेहनत की क़द्र प्रकृति भी करती है।

 

 

 

 

 

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