Prerak Prasang in Hindi Language / प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानियां

Prerak Prasang in Hindi Language / प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानियां

Prerak Prasang in Hindi मित्रों इस पोस्ट में छोटे प्रेरक प्रसंग दिए गए हैं।  यह Prerak Prasang in Hindi With Moral आपको जरूर पसंद आएगी।

 

 

 

Prerak Prasang in Hindi To Read 

 

 

 

 

 

 

भोला एक बस चलाने वाला ड्राइवर था। उसकी अपनी खुद की बस थी। वह यात्रियों को गांव से शहर तक छोड़ता था, फिर शहर से उन्हें घर ले आता था।

 

 

 

 

एक दिन भोला अपनी बस लेकर जा रहा था, तो एक हाथी भोला के बस के सामने आकर खड़ा हो गया। वह हाथी के सामने आकर बोला, “तुम रोज ही हमारी बस के सामने आकर क्यों खड़े हो जाते हो ?”

 

 

 

 

हाथी बोला, “मनुष्यो ने हमारे जंगल को नष्ट कर दिया है। हमे खाने के लिए कुछ भी नहीं मिलता और हमे तुम्हारे गाड़ी का रंग भी बहुत अच्छा लगता है। इसलिए मैं तुम्हारी गाड़ी के सामने आकर खड़ा हो जाता हूँ।”

 

 

 

प्रेरक प्रसंग हिंदी कहानियां

 

 

 

भोला ने हाथी से कहा, “कल से मैं तुम्हारे लिए कुछ खाने का प्रबंध अवश्य करूँगा। लेकिन तुम गाड़ी के सामने मत आया करो नहीं तो गाड़ी से टक्कर लगकर नुकसान हो सकता है।”

 

 

 

 

 

दूसरे दिन भोला हाथी के लिए ढेर सारा केला लेकर गया। गाड़ी को देखते ही हाथी गाड़ी के सामने आकर खड़ा हो गया। भोला ने उसे केला खिलाया फिर अपनी यात्रियों से भरी गाड़ी लेकर शहर की तरफ चला गया।

 

 

 

 

एक दिन भोला हाथी को केला खिला रहा था। तभी एक यात्री बस से उतरकर कहने लगा, “तुम अपना और हम लोगो का समय क्यों खराब कर रहे हो ? इस हाथी को खिलाकर तुम्हे क्या मिलता है लेकिन हम लोगो का समय नष्ट हो जाता है।”

 

 

 

Prerak Prasang in Hindi

 

 

 

तभी भोला बोला, “यह जानवर बोल नहीं सकता है। मैंने भूख को करीब से देखा है। इस जानवर को खिलाकर हमे संतोष मिलता है। यह हमारी अपनी बस है अगर तुमको जाने की जल्दी पड़ी है तो तुम किसी दूसरी बस से जा सकते हो।”

 

 

 

 

वह आदमी अपना सा मुंह लेकर बस में जा बैठा। तभी भोला हाथी को केला खिलाकर आया और बस को लेकर चला गया। घर आकर उसने अपनी पत्नी को हाथी वाली बात बता दिया।

 

 

 

 

उसकी पत्नी भी बहुत खुश हो गई। भोला जहां से केला खरीदता था, उस दुकानदार का नाम बंशी था। एक दिन बंशी ने जिज्ञासा वस पूछ लिया, “भोला तुम इतना सारा केला कहां लेकर जाते हो ?”

 

 

 

 

तब भोला ने बंशी को बताया कि एक भूखे हाथी की सहायता करता हूँ। अब बंशी खुश होते हुए बोला, “आज से मैं जो केला तुम्हे दूंगा उसके पैसे मैं नहीं लूंगा। मैं अपने थोड़े से पैसे में गुजारा कर लूंगा लेकिन तुम्हे मैं हाथी को खिलाने के लिए केला अवश्य ही दूंगा।”

 

 

 

 

कुछ समय के बाद भोला की तबीयत खराब हो गई थी। उसने अपनी पत्नी से कहा, “तुम गाड़ी की चाभी हमारे छोटे भाई शंकर के पास देकर कहना वह गाड़ी लेकर शहर चला जाया करे।”

 

 

 

 

भोला की पत्नी गाड़ी की चाभी लेकर शंकर के पास गई और बोली, “तुम्हारे भाई की तबीयत ठीक नहीं है। तुम गाड़ी लेकर शहर जाओ और जो भी पैसा मिलेगा उसे तुम खुद अपने पास रख लेना।”

 

 

 

 

भोला के पास उसकी पत्नी लौट आई। अपनी पत्नी को आया हुआ देखकर भोला कहने लगा, “क्या तुमने शंकर से हाथी के लिए कुछ ले जाने के लिए नहीं कहा ?”

 

 

 

 

भोला की पत्नी बोली, “मैं तो शंकर को बताने के लिए भूल गई कि हाथी को खिलाने के लिए कुछ ले लेना।”

 

 

 

 

“अब तो शंकर रात को आएगा।” भोला ने कहा।

 

 

 

 

उसकी औरत बोली, “कल सुबह जाकर शंकर से कह देगी कि हाथी के लिए कुछ खाने के लिए लेता जाए। सुबह जब शंकर को बताने के लिए भोला की औरत गई तब तक शंकर गाड़ी लेकर चला गया था।

 

 

 

 

उधर हाथी कई दिन से भोला से न मिलने के कारण परेशान था। शंकर जब गाड़ी लेकर जा रहा था। तब हाथी गाड़ी का रंग पहचानकर सामने आकर खड़ा हो गया।

 

 

 

 

हाथी ने सोचा कि उसका दोस्त भोला आया है।उसे कुछ खाने को मिलेगा लेकिन शंकर गाड़ी से उतरकर हाथी को गाड़ी के सामने से हटाने लगा। लेकिन हाथी नहीं हटा तब शंकर ने उसे मारकर हटा दिया।

 

 

 

 

हाथी मार खाने के बाद सोचने लगा मेरा दोस्त हमे खाने के लिए देता था लेकिन यह तो हमे मारता है। दूसरे दिन फिर भोला की तलाश में हाथी गाड़ी के सामने आकर खड़ा हो गया।

 

 

 

 

लेकिन इस बार भी शंकर ही गाड़ी में था और गाड़ी से उतरकर हाथी को मारकर भगा दिया। लेकिन एक जगह गाड़ी मोड़ते समय गाड़ी एक खाई में जाकर आधी फस गई।

 

 

 

 

शंकर ने लाख प्रयास किया लेकिन गाड़ी निकालने में सफल नहीं हो सका। अब शंकर मदद के लिए आवाज लगाने लगा। हाथी थोड़ी ही दूर गया था।

 

 

 

 

 

उसने आवाज सुनी तो गाड़ी की तरफ दौड़ पड़ा। फिर हाथी ने अपनी सूंड से फसाकर गाड़ी को खाई से बाहर निकाल लिया। अब शंकर को अपने व्यवहार पर पश्चाताप होने लगा।

 

 

 

 

वह हाथी के पास जाकर बोला, “तुमने हमारी मदद किया लेकिन हमने तुम्हे मार दिया था। मैं इसके लिए क्षमा मांगता हूँ।”

 

 

 

 

 

हाथी बोला, “यह गाड़ी हमारे दोस्त भोला की है और मैं भोला का नुकसान होते नहीं देख सकता था।”

 

 

 

 

शंकर घर जाकर अपने भाई से हाथी की बात कहने लगा। भोला ने कहा, “शंकर तुम जाकर हाथी को यहां बुलाकर लाओ।”

 

 

 

 

शंकर हाथी को बुलाकर घर लाया। हाथी भोला को देखकर रोने लगा। भोला कहने लगा मेरे दोस्त अब तुम जंगल में नहीं रहोगे। अब हाथी और भोला साथ-साथ रहने लगे।

 

 

 

 

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