14 + Best Motivational Story in Hindi / 14 बेहद प्रेरणादायक हिंदी कहानियां

14 + Best Motivational Story in Hindi / 14 बेहद प्रेरणादायक हिंदी कहानियां

Motivational Story in Hindi मित्रों इस पोस्ट में Motivational Story in Hindi की 9 Preranadayak Hindi Kahaniyan दी गयी हैं।

 

 

 

 

किशोर का गांव ( Motivational Story in Hindi )

 

 

 

 

 

 

 

1- मित्रों बदलाव आसानी से नहीं होता है।  उसके लिए किसी ना किसी को आगे आना ही पड़ता है और उस Problem से जूझना पड़ता है, तब जाकर आपको जीत मिलती है। आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

किशोर पढ़ने में होशियार था। लेकिन अपने Village की हालत देखकर वह बहुत दुखी रहता था क्योंकि वहां साफ़ – सफाई नहीं थी और इससे बीमारियां फैलती थीं। लेकिन उसके Resolution के बारे में कोई सोचता नहीं था।

 

 

 

 

हिन्दी प्रेरक कहानी 

 

 

 

 

 

किशोर ने एक युक्ति सोची। उसने हम उम्र बालकों का एक Group बनाई और अपनी तरफ से Try करने लगा। सुबह चार लड़के जिनमें किशोर भी था सबसे पहले गांव की सफाई करते और जब तक लोग कुछ समझते गांव की सफाई हो जाती थी।

 

 

 

 

 

इससे बीमारियां काम होने लगीं और सभी Healthy रहने लगे।  छोटे बच्चों के प्रयास को देखकर गांव वालों का व्यवहार बदल गया और सभी लोग गांव की साफ़ – सफाई पर ध्यान देने लगे।

 

 

 

 

Moral Of This Story – अच्छे कार्य के लिए छोटे हो या बड़ा उसका हौसला होना चाहिए।

 

 

 

 

 

हर पल तैयार रहो Top Motivational Story in Hindi 

 

 

 

Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

 

 

 

 

2- मनुष्य को हर समय तैयार और सतर्क रहना चाहिये और हर Situation से लड़ना सीखना चाहिये। अचानक से आने वाली मुसीबत से भी लड़ने के लिए तत्पर रहना चाहिए। आज की Motivational Story  इसी पर आधारित है।

 

 

 

StartUp की सबसे बड़ी मुसीबत है कि काम चला ही नहीं बस लोग पूछने आ जायेंगे “कुछ निकल रहा है।अरे भाई Problem क्या है ? आप अपना देखो ना।

 

 

 

 

रमेश ने एक Startup शुरू किया। वह Story in Hindi  लिखता था, लेकिन Competition ना हो इसलिये उसने यह बात छुपा रखी थी।

 

 

 

 

कई दिनों से यह कार्य चल रहा था,लेकिन Covid19 के समय जब उसके घर के अन्य सदस्य Company में नहीं जा पा रहे थे तो उसने सोचा क्यो ना इस Time का Use किया जाये। इस तरह से एक पंथ दो काज हो जायेगा।

 

 

 

 

 

अर्थात Website का भी काम हो जायेगा और बाहर भी नहीं जाना पड़ेगा। हालांकि अभी उस Website से कोई Income नहीं हो रही थी।

 

 

 

 

घर के सदस्यों ने भी तय किया कि इस समय बाहर जाना उचित नहीं है। सो 6 Month हम बैठकर खा लेंगे। वैसे भी आदमी पैसे बुरे वक्त के लिये ही बचाकर रखता है।

 

 

 

 

इसे भी पढ़ें Motivational Story in Hindi Wikipedia / 8 हिंदी प्रेरक कहानियां

 

 

 

 

 

1 – 2 महीने गुजरने के बाद अगल – बगल वालों को लगने लगा कि जरूर यह Work From Home से कुछ Income कर रहे है ? उन्होंने बार  – बार रमेश से पूछना शुरू कर दिया कि इससे कुछ Income होती है ? लेकिन हर बार रमेश कह देता कि नहीं हो रही है। लेकिन उन्हें अब इस बात पर believe नहीं हो रहा था और उन्होंने इसके बारे में Room owner से कह दिया और उसके कान भर दिए।

 

 

 

 

 

इसपर Room owner रमेश के घर आया और पूछा, “तुम घर से ही क्या काम करते हो ?” पहले रमेश ने इन सब से बचते हुए कहा, “यह Work From Home है।” लेकिन Room owner ने गुस्से से कहा, “नहीं सच – सच बताओ कि क्या काम करते हो ?”

 

 

 

 

 

 

इसपर रमेश ने कहा, “मैं Story Writer हूँ और यह कोइ Crime नहीं है। तमाम फ़िल्में और Songs तभी चलते है जब उसे लिखा जाता है। Films और Songs की नीव होती है Writing . यह लोग जाकर आपसे मेरी शिकायत करके आये है। क्या मैं इनसे पूछने जाता हूँ कि यह कितना Income करते है? हम इस कार्य को आगे बढ़ने के लिये और  Covid19 से बचने के लिये अपने Earn किये हुए पैसे खर्च कर रहे है, और हम क्या कर रहे है। कितना Earning कर रहे यह पूछने वाले यह कौन है ? और अब तो यह इस Line के बारे में जान गए ,तो कर ले Competition समझ में आ जायेगा। कितना Hard Work है…….”

 

 

 

 

 

सब चुप थे. रमेश ने फिर कहा, “कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। हो तैयार खोने के लिये। मैं बताता हूँ कैसे Website Ready की जाती है। करोगे Hard Work ? Online Income और  Website में ही बहुत सारे क्षेत्र है। आप दूसरी Line करो।”

 

 

 

 

 

 

सभी एकदम चुप थे और शर्मिंदा थे। Room Owner खुश होते हुए बोला, “Very Good . आज के ज़माने में StartUp बहुत आवश्यक है। आगे बढ़ो ” उसके बाद उसने पड़ोसियों को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर अब किसी ने कोई भी चालाकी दिखाई तो Room खाली करवा दूंगा।”

 

 

 

 

Moral Of this Story – सच्चाई और Hard Work की हर जगह जीत होती है।

 

 

 

 

 

सहयोग से विकास संभव है

 

 

 

Best Motivational Story in Hindi

 

 

 

3- मित्रों हमेशा हमें कुछ बड़ा और कुछ अलग करने की कोशिश करनी चाहिए।  जो सब कर रहे हैं वही आप भी करेंगे तो आप भीड़ में खो जाएंगे।  लीक से हटकर कुछ नया करें।  हालांकि उसमें अड़चने आएँगी, परन्तु आपको Success निश्चित तौर पर मिलेगी।  आज की यह कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

जगन्नाथ एक माध्यम वर्गीय किसान थे। उनका एक लड़का था, जिसका नाम विनय था । वह अपने पिता की आमदनी से संतुष्ट नहीं था। उसके मन में कुछ अलग ही योजना थी। विनय ने पपीते की खेती करने की सोची।

 

 

 

 

उसने अपने पिता से खेत के कुछ हिस्से मांगे और उसमे पपीता के पौधे लगाए। कुछ समय बाद पपीते में फल आ गए। विनय बाजार गया और एक व्यापारी को बुलाकर लाया, और अपने पपीते का पेड़ दिखाया और उन पेड़ों पर लदे पपीतों का आकलन करने को कहा।

 

 

 

 

 

व्यपारी ने कहा, “यह सब पपीते पांच हजार मूल्य के है।” विनय से उसी मूल्य पर व्यापारी ने करार कर लिया और उसे पांच हजार रूपए दे दिये। पैसे पाकर विनय ने अपने पिता को सारी बात बताई। फिर उसके पिता ने उसे बड़े खेतों में और अच्छे से पपीता उगाने की सलाह दी।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story- हमेशा अपने विकास के लिए प्रयास करना चाहिए।

 

 

 

 

भोजन की बर्बादी मत करो Motivational Story Hindi

 

 

 

 

 

4- मित्रों क्या आपको पता है कि आज के समय में दुनिया में लाखों लोग भूखे सोते हैं।  लाखों लोग कुपोषण के शिकार हैं।  भारत में भी कई जगहों पर कुपोषण की समस्या है, जबकि शादी – विवाह या ऐसे कई प्रोग्राम से लेकर कई जगहों पर भोजन की बर्बादी होती है।

 

 

 

 

मित्रों हमारी भी कुछ जिम्मेदारी होनी चाहिए कि भोजन बर्बाद ना जाए और वह जरूरतमंद लोगों तक पहुँच सके।  आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

मोहन के मन में गरीबी से लड़ने का जज्बा था। लोगों को भूखा देखकर वह द्रवित हो जाता था। वह अपने गांव के प्रत्येक घर से दो रोटियां रोज मांगता था और रात्रि के समय एक मंदिर के किनारे बैठकर भूखों को भोजन कराता था।

 

 

 

 

 

उसके इस कार्य को देखकर अन्य लोग भी उससे जुड़ने लगे और सहयोग करने लगे। धीरे – धीरे मोहन के साथ दस लोग जुड़ गए। शादी जैसे प्रोग्राम में लोग स्वयं ही बचा हुआ खाना मोहन को लाकर देने लगे। उसके इस छोटे प्रयास से गरीब और बेसहारा लोगों को भोजन मिल जाता और खाने का दुरुपयोग नहीं होता था।

 

 

 

 

Moral Of This Story – छोटे – छोटे प्रयास से भी सहायता करनी चाहिए।

 

 

 

 

संदेह का पौधा हिंदी प्रेरक कहानियाँ 

 

 

 

 

5- संदेह अर्थात शक विघटन का सबसे बड़ा कारण होता है, इसलिए कभी doubt नहीं करना चाहिये। लेकिन जब हम बात परिवार की करते है या फिर कही भी ऐसा कार्य करें शक उत्पन्न ही ना हो। सब कुछ Open रखें, सबके सामने रखें। अगर छुपाएंगे तो शक होगा ही। आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

 

राम और श्याम दो भाइयों का परिवार बहुत ही खुशहाल था। क्योंकि उन्हें अपने पिता से अच्छे संस्कार और ऊँचे विचार मिले थे। दोनों भाई कोई भी कार्य करने से पहले आपस में विचार विमर्श जरूर किया करते थे।

 

 

 

 

 

दोनों भाइयों के स्नेह को देखकर उनके बच्चे भी आपस में बड़े प्रेम से रहते थे। हर कोई इनके family में Doubt का दूषित पौधा रोपना चाहते थे, लेकिन राम और श्याम अपने विवेक से समझकर उस संदेह के पौधे को अंकुरित ही नहीं हने देते थे और उनका जीवन आराम से चल रहा था।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – अच्छी सेहत के लिए कम खाओ परिवार की कृषि के लिए गम खाओ।

 

 

 

 

दरोगा Hindi Motivational Kahani 

 

 

 

 

6- मित्रों कभी भी ख्वाब ऊँचे देखो। गरीब जन्म लेना बुरी बात है, गरीब मरना बुरी बात है। इसलिए ख्वाब ऊँचे देखो और उसे पाने के लिये तत्पर रहो। Success मिलेगी ही। आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

विपिन अपनी पिता का एकलौता संतान था। विपिन के पिता रमेश एक मध्य वर्गीय किसान थे, लेकिन अपने बेटे के लिए उन्होंने ऊचा सपना देखा था। रमेश अपनी जरूरतों को कम करके विपिन को इस योग्य बनाया था, जो आज दरोगा के पद के लिए उसकी नियुक्ति हुई थी।

 

 

 

 

 

पिता के ऊँचे विचार से विपिन बहुत प्रभावित था, इसलिए वह कभी अपने कर्तव्य से नहीं डिगा। ऐसे  Dutiful अफसर के ऊपर पूरे थाने को गर्व था, क्योंकि विपिन जन आवाज को प्राथमिकता देता था।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – अपने कर्तव्य और प्रयास को सदैव प्राथमिकता देना चाहिए।

 

 

 

 

 

कर्तव्य और अधिकार हिंदी कहानी 

 

 

 

Best Motivational Story in Hindi

 

 

 

7-कर्तव्य और अधिकार हमारे जीवन के दो पहलू है। लेकिन, दोनों की अपनी मर्यादा है और अगर कोई कार्य मर्यादा में रहकर किया जाये तभी वह उचित होता है। आज की कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

 

बच्चों की दो टोली में कर्तव्य और अधिकार की लड़ाई चल रही थी। जिसमे एक टोली का नाम कर्तव्य था और दूसरी टोली का नाम अधिकार था। अधिकार ने बड़े शान के साथ चलते हुए सड़क पर गंदगी कर दिया।

 

 

 

 

 

तभी कर्तव्य ने उसे याद दिलाया सड़क पर चलना आपका मूलभूत अधिकार है। लेकिन इस सड़क को साफ रखने की जिम्मेदारी भी आपकी है।

 

 

 

 

 

कर्तव्य ने फिर अधिकार को याद दिलाया, अगर आप अपने अधिकार के उपयोग से इस सड़क का अतिक्रमण करेंगे तो यह चलने के लायक नहीं बचेगी।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story- अधिकार के साथ कर्तव्य भी याद रखो।

 

 

 

 

कर्म प्रेरक कहानी Best Motivational Story in Hindi

 

 

 

 

8- कर्म करो। अच्छे कर्म होंगे तो God आपकी Help अवश्य करेंगे, लेकिन जब आपके कर्म बुरे होंगे तो भगवान चाहकर भी आपकी सहायता नहीं करेंगे। महाभारत युद्ध में कर्म अच्छे होने के कारण ही श्री कृष्ण ने पांडवों की सहायता की जबकि वह अपनी सेना को कौरवों को दे चुके थे।

 

 

 

 

 

भक्तों की लम्बी क़तार महावीर के द्वार पर लगी थी। कोई कुछ न कुछ मांग ही रहा था। सभी लोग अपनी परेशानी का अंत बजरंग बली के दरबार में करना चाह रहे थे।

 

 

 

 

एक वृद्ध पुरुष महावीर के दर्शन के लिए जाना चाहते थे। लेकिन हर कोई उन्हें पीछे छोड़ देता था। वह बृद्ध हैरान परेशान होकर वहां से चले गए।

 

 

 

 

क्योंकि हर कोई थोड़े से प्रसाद के रूप में अपने किए खराब कर्मों से छुटकारा पाना चाहता था, जबकि उन बुजुर्ग को दर्शन से रोककर वह और भी पाप कर रहे थे। मित्रों हमेशा सबका सम्मान करो, पुण्य कर्म करो भगवान् की सहायता उनकी कृपा आप तक पहुंचती रहेगी।

 

 

 

 

 

चींटी का प्रयास Motivational Story in Hindi Pdf 

 

 

 

 

 

9- मित्रों सहयोग के बगैर कार्य करने में परेशानी आती है और अगर उचित सहयोग रहे तो कार्य जल्द ही संपन्न होता है, जैसे एक चींटी शक़्कर के छोटे से टुकड़े को एक खींचने का प्रयास कर रही थी, लेकिन वह असफल हो जाती थी। उसे असफल देखकर अन्य चीटियां भी वहां आ गई और सभी मिलकर उस शक़्कर के टुकड़े को खींच लिया।

 

 

 

 

मित्रों इसी प्रकार आपसी सहयोग से आप किसी भी कार्य को कर सकते हैं, परन्तु आपसी सहयोग के साथ ही विश्वास और सामंज्यस भी आवश्यक है और यह आपको ध्यान रखना है कि आपका सहयोगी आपका साथ दे रहा है या फिर विश्वासघात कर रहा है।

 

 

 

 

सीख – बिना सहयोग के कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता, परन्तु सहयोग निश्छल होना चाहिए। 

 

 

 

कल नहीं आता है मोटिवेशनल कहानी 

 

 

 

10- मित्रों कोई भी काम कल पर नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि कल आता ही नहीं है। आपने वह कहावत तो सुनी होगी आज नगद कल उधार क्योंकि कल आयेगा ही नहीं तो उधार कैसे कोई लेगा।

 

 

 

 

 

मित्रों आप अक्सर ऐसा करते होंगे कि पढ़ाई कल के लिये टाल देते होंगे जो कि बिलकुल ही गलत है। आपको First Day से ही Target Fix करना होगा और उसे किसी भी हालत में पाना होगा। तब आप Success होंगे।

 

 

 

 

 

 

अगर आप यह सोचेंगे कि अरे पूरा साल तो बाकी है, कल पढ़ लूंगा तो मित्रों यही आप सबसे बड़ी Mistake कर देते है। साल में 365 दिन होते है और उसमे आधी रात होती है, कुछ छुट्टियां होती है तो आपके पास Days ही कितने बचते है। सो आप First Day से ही Hard Work शुरू करें। आज की यह छोटी सी कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

 

राम और श्याम बहुत ही गहरे मित्र थे। लोग उनकी मित्रता की मिशाल देते थे। वे साथ-साथ पढ़ते, खेलते और खुश रहते। एक दिन की बात है दोनों खेलते-खेलते जंगल की ओर चले गए। जंगल के रास्ते से वे अनजान थे। अचानक से राम एक कुंए में गिर गया और चिल्लाने लगा।

 

 

 

 

 

 

यह देखकर श्याम पहले तो डर गया, लेकिन उसने फिर हिम्मत से काम लिया और इधर उधर देखने पर जब उसे कोई नहीं दिखाई दिया तो पास ही पड़ी कुंए से पानी निकालने वाली बाल्टी को उसने कुंए में फेंका। उस बाल्टी को राम ने पकड़ लिया।

 

 

 

 

 

श्याम पूरी ताकत से उसे खींचने लगा। श्याम ने तय कर लिया था, “चाहे कुछ हो जाये वह राम को बाहर निकालकर ही रहेगा।” कड़ी मेहनत के बाद उसे Success मिल ही गयी और अब राम कुंए से बाहर आ गया था। दोनों बहुत खुश थे।

 

 

 

 

 

 

मित्रों श्याम अगर गांव से किसी को बुलाने जाता तो निश्चय ही कोई अनहोनी हो सकती थी। लेकिन उसने कल के काम को तुरंत करना उचित समझा और वह सफल हो गया। इसी तरह कल के लिए कोई काम मत छोड़ो।

 

 

आलस्य बहुत बुरी बात है 

 

 

 

 

 

11- मित्रों आलस्य बहुत ही बुरी बात है। आपको जो कार्य दिया जाये आप उसे तुरंत ही कर लें, आलस्य ना करें। आलस्य आपको निश्चित ही नुकसान पहुंचता है। आज की यह कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

एक गांव में एक बेहद ही आलसी युवक रहता था। अलसी मतलब कि वह उच्च कोटि का आलसी था। आज के समय में निश्चित ही उसे कोई Award मिल ही जाता। उसकी इस आदत से उसके घर वाले बहुत परेशान थे।

 

 

 

 

 

एक दिन की बात है किसी तरह वह एक बाग़ में पहुंचा। वहां ढेर सारे आम के पेड़ लगे हुए थे। आम का सीजन था। वह एक पेड़ के नीचे सो गया। कुछ देर बाद वहां एक पका हुआ आम गिरा। उसमे से बहुत ही अच्छी खुशबू आ रही थी।

 

 

 

 

 

यह देखकर उस युवक के मुंह में पानी आ गया। लेकिन वह आदत से मजबूर था। आम उसके बगल में ही गिरा था परन्तु अपनी आलस्य के कारण वह उसे उठा नहीं रहा था। वह सोच रहा था कोई जादू होता जिससे यह आम मेरे हाथ में आ जाता और मैं इसे खा लेता।

 

 

 

 

 

वह सोच ही रहा था कि उधर से गांव के प्रधान उसी रास्ते से कहीं जा रहे थे। उन्हें देखकर वह युवक अलसायी आवाज में बोला, “प्रधान जी, जरा यह आम मुझे दे दो।”

 

 

 

 

 

यह देखकर प्रधान जी को बहुत गुस्सा आया। उन्होंने कहा, “यह आम तो तुम्हारे बगल में ही है। तुम इसे उठा लो।” इसपर उस अलसी ने कहा, “प्रधान जी, वहां तक हाथ बढ़ने में बड़ी मेहनत होगी। कृपया आप ही आम दे दो।”

 

 

 

 

 

 

इसपर प्रधान जी ने कहा, “अच्छा बेटा, मेहनत होगी।” यह कहकर प्रधान जी उसके पास आये और उसे उठाकर एक आम की निचली डाल पर रख दिया और आम लेकर चले गए। आलसी का आलस अभी भी नहीं गया।

 

 

 

 

 

वह उसी डाल पर सोने लगा और जैसे ही वह सोया उसका Balance बिगड़ा और वह जमीन पर गिर पड़ा। उसे थोड़ी चोट भी आयी। अब उसे पछतावा होने लगा और उसने आलस्य को त्यागने का फैसला किया।

 

 

 

 

 

मित्रों इसीलिए कहा गया है। कभी-कभी चोट भी दवा का काम करती है। तो मित्रों आलस्य कभी भी मत करो।

 

 

 

बेस्ट मोटिवेशनल कहानी 

 

 

 

 

12- हिंदी में कहावत है उधार का खाना पुआल पर पकाना, इसका अर्थ यह है कि जिस तरह पुआल की आग पर खाना नहीं बन सकता क्योकि पुआल जलाने पर बहुत तेज जलता है लेकिन क्षण भर में वह आग बुझ जाती है। उसी तरह कर्ज का पैसा तुरंत दिखता है, लेकिन उसके बाद फिर फांका मस्ती या सेठ साहूकार द्वारा या फिर बैंक द्वारा कर्जदार के ऊपर उसकी सम्पत्ति के ऊपर कब्ज़ा हो जाता है, और कर्ज के मर्ज में कोई भी फंस सकता है।

 

 

 

 

 

वह मनुष्य, समाज या देश कभी  भी चैन की नींद नहीं सो पाता क्योंकि कर्ज देने वाले की फ़ांस सदैव त्रास देती है। आज की यह कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

जिसने भी कर्ज और मर्ज को हल्के में लिया, उसे परेशानी के सिवाय कुछ नहीं मिलता।  रीनू और वीनू दोनों बचपन की सहेलियां थी।

 

 

 

 

 

रीनू के पिता अपनी पुत्री की इच्छा को सीमित मात्रा में पूरा करते थे, लेकिन वीनू के पिता अपनी पुत्री की इच्छा को सीमित  न रखकर उसका विस्तार कर देते थे।

 

 

 

 

 

दोनों सहेलियों को अपने-अपने पिता के गुण विरासत में मिले थे। रीनू अपने दो बच्चों के साथ जीवन यापन कर रही थी। रीनू के पति का देहावसान हो गया था।

 

 

 

 

 

बच्चे छोटे थे, लेकिन पति द्वारा कमाया हुआ कुछ धन था। रीनू उसके सहारे अपने बच्चों के साथ उनकी आवश्यकता की पूर्ति भी सीमित मात्रा में करती अर्थात जोड़-तोड़कर ही काम चलाती थी, क्योंकि वह अपने बच्चों को कर्ज का उपहार नहीं देना चाहती थी।

 

 

 

 

 

रीनू की इस आदत को उसकी सहेली बीनू मजाक बना देती थी। रीनू को कष्ट बहुत होता था, लेकिन उसे आत्मसंतोष होता था क्योंकि उसके ऊपर कर्ज का मर्ज नहीं था।

 

 

 

 

 

 

दूसरी तरफ वीनू और उसका पति कमाई अठन्नी खर्चा रुपैया की कहावत को चरितार्थ कर रहे थे। नौबत यहां तक आ गयी कि वीनू को भी अपने बच्चों की आवश्यकता की पूर्ति के लिए नौकरी करनी पड़ी।

 

 

 

 

बेटी की शादी के लिए भारी भरकम कर्ज लिया। वह कर्ज की पूर्ति भी नहीं कर पाए थे कि लड़के का शादी कर दिए, इस उद्देश्य के साथ कि उसके बाद कोई कार्य शेष नहीं रहेगा और कर्ज की अदायगी कर देंगे।

 

 

 

 

 

उम्र के अनुसार वीनू नौकरी करने की स्थिति में नहीं थी। पति की कमाई उतनी नहीं थी कि घर चलाते हुए कर्ज के मर्ज का इलाज कर सके।

 

 

 

 

लड़के की स्थिति यह थी कि अपनी पढ़ाई को देखकर उसे छोटा कार्य करने में परेशानी होती थी, इसलिए वीनू का परिवार कर्ज के लाइलाज मर्ज में जकड़ गया था।

 

 

 

 

 

अब रीनू को देखिए अपना और बच्चों का सीमित मात्रा में आवश्यकता की पूर्ति से उसके कुछ पैसे बच गए। लड़की की शादी भी साधारण तरीके से कर दिया।

 

 

 

 

 

उसका लड़का भी समझदार था। स्थिति को भांपते हुए १२वीं के बाद अपनी पढ़ाई को स्वतः रोक दिया और माँ का सहारा बन गया।

 

 

 

 

 

फर्क कहां था – दोनों सहेली मध्यम वर्गीय थी रीनू की कमाई भी कम थी। वीनू की कमाई ज्यादा होते हुए भी वह कर्ज के मर्ज में घिर गई जबकि रीनू के पास कर्ज की मर्ज ने आने का साहस ही नहीं किया।

 

 

 

 

दोनों में फर्क यह था कि रीनू ने मर्ज को पहचाना इसके लिए उसे सहेली और समाज का तंज भी सहना पड़ा लेकिन आज वह सुखी है। लेकिन वीनू ने समाज को खुश रखने के लिए अपनी जरूरतों को कम नहीं किया परिणाम वह कर्ज के जाल में उलझती गई और परेशानी से घिर गई।

 

 

 

 

 

सीख- जीवन में ऐसी बहुत सी चीजें है जिनके बिना जीवन जिया जा सकता है। वर्तमान में थोड़ा तकलीफ सहकर भविष्य उज्वल किया जा सकता है।

 

 

 

मेढक की कहानी

 

 

 

13- मनुष्य अपने जीवन में बहुत मेहनत करता है लेकिन सफल न होने से निराश हो जाता है। कभी-कभी तो मनुष्य अपनी सफलता के करीब पहुंच कर भी फिसल जाता है। कई बार तो अपने आस-पड़ोस के मनुष्य भी इतनी आलोचना करते है। इतना हतोत्साहित कर देते है कि मनुष्य का खुद के ऊपर से विश्वास उठ जाता है।

 

 

 

 

लेकिन मनुष्य को दूसरो के द्वारा हतोत्साहित करने या आलोचना करने की आदत पर ध्यान नहीं देकर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दूसरो की कही हुई बातो को इसे ढंग से लेना चाहिए ‘मानो खुद बहरा हो गया है’ और जब किसी की बातो को नहीं सुनकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाय तब सफलता ध्रुव होती है उसे सफल होने से कोई भी नहीं रोक सकता है।

 

 

 

 

 

 

एक जंगल था। वहां जंगल के बीच एक तालाब था और तालाब के बीच में एक चिकना सा खूबसूरत खंभा गड़ा हुआ था। शायद किसी राजा ने अपना शौक पूरा करने के लिए ही उस खूबसूरत और चिकने खंभे को उस तालाब के बीच में लगवा दिया था।

 

 

 

 

उस तालाब में बहुत सारे मेढक रहते थे। एक बार सभी मेढको के बीच होड़ लग गई थी कि कौन इस चिकने खंभे के ऊपर वाले भाग पर सबसे पहले चढ़ पाएगा ?

 

 

 

 

सभी मेढ़क अपने प्रयास में सफल नहीं हो सके। दूसरे तालाब से आए हुए मेढको ने भी प्रयास किया लेकिन अन्य मेढक हतोत्साहित करने लगते फलतः कोई भी मेढक उस खंभे के शीर्ष भाग पर नहीं पहुंच पाया।

 

 

 

 

कोई मेढक आधे खंभे से जाकर गिर जाता था तो कोई आधे खंभे से ऊपर जाकर ही गिर जाता था। कोई मेढक तो शीर्ष भाग के नजदीक पहुंच जाता था तब अन्य मेढक कहने लगते थे कि तुम्हारी इतनी क्षमता ही नहीं है कि शीर्ष पर पहुंच सको।

 

 

 

 

 

शीर्ष के करीब पहुंचने वाला मेढक आलोचनाओं के ऊपर ध्यान देने लगता और फिर तुरंत ही पानी में गिर जाता था। शीर्ष के करीब पहुंचनेवाले मेढक को उस समय बहरा होकर अपना प्रयास करना चाहिए था।

 

 

 

 

लेकिन आलोचनाओं को सुनने के चक्कर में ध्यान लक्ष्य से भटक जाता है और मेढक पानी में गिर पड़ता है। लेकिन एक छोटा सा मेढक बार-बार उस चिकने खंभे पर चढ़ने का प्रयास करता था।

 

 

 

 

अन्य सारे मेढक उसे भी हतोत्साहित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे। लेकिन वह नन्हा सा मेढक अपने आलोचकों की परवाह नहीं करते हुए अपना प्रयास जारी रखे हुए था।

 

 

 

 

जब वह नन्हा सा मेढक शीर्ष पर पहुंचने वाला था तभी सारे मेढको ने जो असफल हो गए थे उस नन्हे मेढक को हतोत्साहित करने लगे।

 

 

 

 

कहने लगे, “अरे हम तो एकदम तुमसे भी अधिक शीर्ष के करीब आ गए थे लेकिन गिर गए। अब तुम शीर्ष पर नहीं पहुंच सकते हो। अपनी समय और ऊर्जा बर्बाद मत करो।”

 

 

 

 

तभी एक मेढक बोला, “उसे मत समझाओ वह तो बहरा है।”

 

 

 

 

मेढको के बीच इसी तरह वार्तालाप चल रहा था। तभी सबकी निगाहे फ़टी ही रह गई। वह नन्हा मेढक बहरा नहीं था। लेकिन अपने लक्ष्य को पाने के लिए ही किसी भी आलोचना और हतोत्साहित करने वाले अन्य लोगो की बात सुनकर बहरा बना हुआ था और अंततः सबकी आलोचना का जवाब शीर्ष पर पहुंचकर ही दिया।

 

 

 

 

 

सभी मेढक उसकी लक्ष्य साधने की कला की प्रशंसा कर रहे थे।

 

 

 

सुधीर को मिली सफ़लता Motivation Story in Hindi

 

 

 

Best Motivational Story in Hindi
Best Motivational Story in Hindi

 

 

14- मनुष्य के जीवन में कई बार ऐसे पल आते है और कई ऐसे इंसान मिलते है कि मनुष्य विश्वास कर लेता है और विश्वास करने के बाद उसे धोखा भी अवश्य मिलता है। विश्वास और धोखा एक सिक्के के दो पहलू होते है और मनुष्य किसी भी व्यक्ति को कितना भी परख ले धोखा मिल ही जाता है। लेकिन धोखा मिलने के बाद मनुष्य को उसपर पश्चाताप करने के वजाय सचेत हो जाना चाहिए और समझदारी से आगे बढ़ने का अवसर ढूँढना चाहिए क्योंकि जिंदगी में सभी को एक बार अवसर जरूर मिलता है।

 

 

 

 

अगर हाथ में आया हुआ अवसर निकल गया तब मनुष्य को एक बार बहुत ही झटका लगता है लेकिन उस झटके को चाहे आर्थिक हो, पारिवारिक हो या मानसिक झटका हो उसे सोचने में समय बर्बाद करना मूर्खता पूर्ण कदम होता है अगर उस झटके से अनुभव लेकर आगे बढ़ जाने पर ही बुद्धिमानी होती है।

 

 

 

 

सुधीर नाम का लड़का था। पढ़ाई करने के पश्चात् वह बेरोजगार था। वह लड़का नौजवान था और उसकी सोच भी सकारात्मक थी।

 

 

 

 

वह लड़का एकदम ओज से भरा हुआ था। आप लोगो ने वह कहावत सुनी होगी ‘मरता क्या नहीं करता’ सुधीर नाम का वह लड़का दूसरे दिन सड़क के किनारे सायकल बनाने की दुकान लगाकर बैठ गया।

 

 

 

 

किस्मत भी उसी का साथ देती है जो मेहनत का हाथ पकड़ता है। धीरे-धीरे समय के साथ सुधीर की दुकान अच्छी रफ्तार से चलने लगी थी।

 

 

 

 

सुधीर ने अपनी दुकान पर सहायता के लिए एक लड़का रख लिया था। एक दिन सुधीर सायकल का कुछ पार्ट लेकर अपनी बाइक से आ रहा था।

 

 

 

 

रास्ते में उसे एक बड़ी गाड़ी वाले ने टक्कर मार दिया सुधीर बहुत ज्यादा घायल हो गया था। उसे दो से तीन महीने अस्पताल में लग गए।

 

 

 

 

इधर वह लड़का जो सुधीर के पास काम पर लगा हुआ था। उसने चालाकी से सुधीर की दुकान पर कब्जा कर लिया था। जबकि सुधीर ने उस लड़के को अच्छे से परखने के बाद ही अपने पास रखा हुआ था।

 

 

 

 

लेकिन विश्वास के बाद ही धोखे का जन्म होता है। उस लड़के ने सुधीर की दुकान पर कब्जा कर लिया था। सुधीर जब अस्पताल से घर आया तो उसके मुंह से निवाला छिन गया था।

 

 

 

 

सब कुछ देखकर सुधीर हतप्रभ हो गया था। लेकिन फिर उसने दुकान की तरफ देखना ही बंद कर दिया। सुधीर को दुकान का अनुभव हो गया था।

 

 

 

 

उसने थोड़ा दूर हटकर नई कोशिश के साथ एक दूसरी दुकान खोल लिया। समय बीतते देर नहीं लगती है। सुधीर की जिंदगी फिर से सामान्य होने लगी।

 

 

 

 

वह लड़का जिसने दुकान हड़प लिया था। हाथ में पैसा आते ही नकारात्मकता से भर गया था क्योंकि सफल तो हुआ जा सकता है लेकिन उस पर टिकना बहुत मुश्किल होता है।

 

 

 

 

उस लड़के के ऊपर कर्ज हो गया था। फलतः दुकान टूट गई और वह फिर पहले की स्थिति में आ गया था। लेकिन सुधीर ने दुबारा हाथ में आए मौके को नहीं गवांया और सफलता के शिखर पर बैठ गया।

 

 

 

 

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Motivational Kahani in Hindi