Motivational Stories in Hindi For Students PDF Free Download

Motivational Stories in Hindi For Students PDF Free Download

Motivational Stories in Hindi For Students PDF मित्रों इस पोस्ट में मोटिवेशनल कहानी दी गयी है।  आप यहां से मोटिवेशनल कहानी फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।

 

 

 

 

 

Short Motivational Stories in Hindi For Students PDF ( दो सिक्के प्रेरणादायक हिंदी कहानी ) 

 

 

 

 

 

अगर आप करने वाला कोई भी कार्य भगवान के ऊपर छोड़कर उसे पुनः मूर्तरूप देते है तो वह आपका सोचा हुआ कार्य आपकी सोच के अनुरूप या कही उससे भी सुंदर हो जाता है। अगर वही कार्य भगवान को समर्पित न करते हुए करने को उद्यत होते है तो वह आपके इच्छा के विरुद्ध हो जाता है।

 

 

 

 

 

जिससे आपको पीड़ा का अनुभव होता है और आप बहुत ही परेशान हो जाते है। इसलिए कोई भी कार्य करने के पहले ही उसे ईश्वर को सुपुर्द कर देना चाहिए। अगर ईश्वर के हाथ में उस कार्य की बागडोर चली गई तो आपकी सफलता को कोई भी रोक नहीं सकता।

 

 

 

 

 

एक बहेलिया था वह रोज पक्षियों को पकड़कर बाजार में बेच देता। उससे मिले हुए पैसों से अपनी क्षुधा शांति की कोशिश करता था। एक दिन अर्जुन और भगवान कृष्ण घूमते हुए कही जा रहे थे।

 

 

 

 

अर्जुन की निगाह उस बहेलिए के ऊपर गई जो हताश और निराश होकर अपने घर की तरफ जा रहा था क्योंकि उसे आज कोई भी पक्षी नहीं मिला था, जिसे बेचकर अपनी क्षुधा तृप्त कर सकता था।

 

 

 

 

अर्जुन से उसकी दीन दशा देखी नही गई वह उसके पास गए और बोले, “हे भ्राता आप इतने दीन मुद्रा में क्यों जा रहे है। आप हमें बताइए क्या बात है ?”

 

 

 

 

बहेलिए ने अर्जुन को पूरी बात बता दिया और बोला, “आज तो हमें भूखा ही सोना पड़ेगा।”

 

 

 

 

अर्जुन ने उस बहेलिए को स्वर्ण मुद्रा की पोटली देते हुए कहा, “यह स्वर्ण मुद्रा अपने पास रखो अब तुम्हारे बुरे दिन कट जाएगे।”

 

 

 

 

 

बहेलिया स्वर्ण मुद्रा पाकर बहुत ही प्रसन्न था और जल्द ही घर पहुंच जाना चाहता था। शाम हो रही थी सामने से एक लुटेरा आया और उसकी स्वर्ण मुद्रा की पोटली को छीनकर भाग गया।

 

 

 

 

 

बहेलिया थका हारा घर पहुंचकर सब बात अपनी पत्नी को बता दिया। घर में कुछ नहीं रहने के कारण दोनो प्राणियों को भूखा ही सोना पड़ा था। दूसरे दिन बहेलिया जंगल में गया। पूरा दिन बीतने पर भी एक भी पक्षी जाल में नहीं फसा था।

 

 

 

 

 

वह निराश होकर अपने घर के लिए जा रहा था लेकिन फिर अर्जुन और कन्हैया सामने मिल गए। अर्जुन ने पूछा, ” भ्राता आज आप फिर वही अपना पुराना कार्य दोहराने आये थे।”

 

 

 

 

 

बहेलिए ने पूरी बात बता दिया। अर्जुन ने उसे एक बहुमूल्य मोती देते हुए कहा, “इसे ले जाओ अब तुम्हारे सभी दुःख दूर हो जाएगे।”

 

 

 

 

बहेलिया ख़ुशी-ख़ुशी घर पहुंचा। मोती रखने के लिए उस निर्धन के पास कोई भी पात्र नहीं था, सो उसने मोती को एक पुराने मटके में रख दिया था। उसकी पत्नी पानी भरने गई थी। मिट्टी का पात्र नया होने के कारण वह टूट गया।

 

 

 

 

 

वह फिर उस पुराने पात्र को लेकर पानी भरने नदी पर चली गई। पानी भरते समय वह मोती नदी में गिर गया, उसे एक मछली ने निगल लिया था। वह पानी लेकर घर आई तो बहेलिया बोला, “तुम इस पुराने मटके में पानी भरने गई। इसमें हमारी जिंदगी का सबसे कीमती मोती रखा हुआ था जो अब पानी में बह चुका है।” बहेलिए की औरत ने अपना सर पीट लिया।

 

 

 

 

 

तीसरे दिन फिर बहेलिया अपने भोजन की तलाश में जंगल गया तो वहां फिर अर्जुन और मुरारी मिले। अर्जुन ने बहेलिए से पूछा तो उसने बता दिया कि कैसे मोती भी हाथ से चला गया।

 

 

 

 

 

अब अर्जुन ने मोहन की तरफ देखकर उस बहेलिए की सहायता करने के लिए प्रार्थना की जो अपनी जिंदगी की दुर्दशा झेल रहा था। केशव ने उस बहेलिए को दो सिक्का दिया और जाने के लिए कह दिए।

 

 

 

 

 

बहेलिया जाते हुए सोच रहा था अर्जुन ने दो बार हमें इतना सारा धन दिया लेकिन भगवान ने हमें केवल दो सिक्का ही दिया। इतने में सामने से एक मछुआरा अपने हाथ में एक मछली पकड़कर आ रहा था।

 

 

 

 

इतना निर्दयी पक्षियों का शिकार करने वाला बहेलिया भी उस मछली को देखकर द्रवित हो उठा और उसके प्राण बचाने के लिए उसे दो सिक्के में खरीद लिया फिर उसे नदी में छोड़ने चल पड़ा।

 

 

 

 

 

नदी के किनारे पहुंचने पर उस मछली के मुख से वह मोती गिर पड़ा। बहेलिया बहुत खुश हुआ और प्रसन्नता के साथ ही वह मछली को पानी में छोड़ दिया, फिर अत्यधिक ख़ुशी के कारण ही चिल्लाने लगा ‘मिल गया, मिल गया।’

 

 

 

 

 

अकस्मात ही वह लुटेरा उधर से जा रहा था और वह दौड़कर बहेलिए के पांव में गिर पड़ा और कहने लगा, “आप अपने स्वर्ण की पोटली ले लो और मुझे राजा से कहकर सजा मत दिलवाना।” लुटेरा शायद यही समझ रहा था कि बहेलिया उसे पहचान गया है, उसने उसे स्वर्ण की पोटली दे दिया।

 

 

 

 

 

चौथे दिन वह बहेलिया अर्जुन और कन्हैया का धन्यवाद करने के लिए जंगल में गया और उन दोनों का धन्यवाद किया और बताया कि उन दो सिक्को से कैसे उसकी किस्मत पलट गई।

 

 

 

 

 

अर्जुन ने इसका कारण पूछा तो श्याम सुंदर बोले, “अर्जुन जब मैंने उसे दो सिक्के दिए तो उसने अपने बारे में न सोचकर उस मछली के बारे में सोचा और उसकी जान बचाई, और जब तुमने उसे सोने के सिक्के और मोती दिए तब वह खुद के बारे में सोचने लगा। जो मनुष्य दूसरे की भलाई के बारे में सोचता है प्रकृति और भगवान उसके उस पुण्य कार्य को दूना करके उसे लौटा देते है और बहेलिए के साथ भी यही हुआ अतः परमार्थ भी करना चाहिए।”

 

 

 

 

 

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