Motivational Hindi Stories With Moral  /  हार से जीत हिंदी मोटिवेशनल कहानी

Motivational Hindi Stories With Moral / हार से जीत हिंदी मोटिवेशनल कहानी

Motivational Hindi Stories मित्रों इस पोस्ट Motivational Hindi Story For Success दी गयी है।  मुझे उम्मीद है कि यह कहानी आपको जरूर ही पसंद आएगी।

 

 

 

 

Motivational Stories Hindi Moral Short ( हार से जीत एक अद्भुत कहानी )

 

 

 

 

क्या कोई अपनी जिंदगी में कभी हार मांग सकता है? सभी लोगो का जवाब होगा ‘नहीं’ . भला  हार किसे पसंद है, जो अपने लिए हार मांगेगा, लेकिन हर आदमी फूलों का हार जरूर मांगता है जिससे किसी को सम्मान दिया जा सके और खुद को भी सम्मान मिल सके।

 

 

 

 

 

हार कर ही व्यक्ति सीखता है और सीखने के बाद ही सफल होता है। ‘हार’ के  बाद जो जीत मिलती है, वह टिकने वाली होती है। जबकि तुरंत मिली हुई जीत को मनुष्य कायम नहीं रख पाता है। जीत मिलना बड़ी बात नहीं है जीत को कायम रखना ही बड़ी बात होती है। जो अनुभव से यानी कि हारने के बाद ही मिलती है।

 

 

 

 

 

गुंजन एक होनहार छात्रा थी। पढ़ाई में बहुत ही तेज लेकिन जब कैरियर की बात आई तो उसने अपने लिए एक ऐसा कैरियर चुना जो चुनौती पूर्ण था। उसने दो एक महिलाओ को साथ लेकर ही ‘विलेज डिस’ की शरुवात की ‘विलेज डिस’ में गांव के व्यंजन बनाए जाते थे।

 

 

 

 

 

वह अपने समूह की महिलाओ द्वारा तैयार किया हुआ व्यंजन खुद होटलो में पहुंचाने लगी। लेकिन उसकी नकल करके दूसरे बड़े व्यापारी इस क्षेत्र में उतर आए फलतः उसे वह व्यापर बंद करना पड़ा। लेकिन गुंजन ने अपने हौसले को कम नहीं होने दिया।

 

 

 

 

 

उसने ‘गारमेंट’ का व्यवसाय शरू किया। लेकिन उसमे भी बड़े लोग कूद पड़े और गुंजन को यह व्यापर भी बंद करना पड़ा लेकिन गुंजन ने इस बार भी हार स्वीकार नहीं किया। समाज के धनी लोगो को यह बात कतई स्वीकार नहीं था कि गुंजन एक महिला होकर आदमी के लिए चुनौती बने।

 

 

 

 

 

लेकिन गुंजन का उद्देश्य तो जल के समान निर्मल था। उसे महिलाओ का उत्थान करना था। इसलिए वह हमेशा हारने के बाद भी नए जोश से पूर्ण होकर अन्य किसी कार्य का श्री गणेश कर देती थी।

 

 

 

 

इस बार उसने गांव को स्वच्छ बनाने का कार्य हाथ में लिया। वह दो महिलाओ के साथ ही गांव-गांव घूमकर सबके घर से और बाहर से भी अवशिष्ट पदार्थ ( कचरा ) इकट्ठा करवाती और एक छोटे से प्लांट में उस अवशिष्ट पदार्थ से बिजली बनाने का कार्य करने लगी।

 

 

 

 

 

इस कार्य को देखकर कथित धनी वर्ग अपने दांतो तले अंगुली दबाने पर मजबूर हो गए। गुंजन पढ़ी हुई छात्रा थी। उसने अपनी आलोचना की परवाह न करते हुए अपने कार्य को जारी रखा। इस कार्य में उसे कोई भी चुनौती देने वाला नहीं मिला।

 

 

 

 

 

आज गुंजन द्वारा शुरू किया गया ‘बिजली बनाने वाला’ प्लांट सरकार ने खुद अपने हाथ में ले लिया और उसमे कई महिलाओ और युवको को रोजगार मिला और ग्राम सफाई का पुरस्कार अलग से मिला। गुंजन आज समाज के सामने एक उप्त हरण बन गई जो पराजित होने के बाद भी विजयी होकर निकली है।

 

 

 

 

 

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