Motivated Story in Hindi Language / बहुत ही प्रेरणादायी हिंदी कहानी।

Motivated Story in Hindi Language / बहुत ही प्रेरणादायी हिंदी कहानी।

Motivated Story in Hindi मित्रों इस पोस्ट में प्रेरणादायक हिंदी कहानी दी गयी है।  यह Motivated Story in Hindi और Goat Story in Hindi आपको जरूर पसंद आएगी।

 

 

 

Motivated Story in Hindi For Kids 

 

 

 

कुमुद की बहू का नाम रजनी था। रजनी बहुत ही खूबसूरत थी। उसे अपनी सुंदरता का बहुत ही घमंड था। वह अपने घर का एक भी काम नहीं करती थी।

 

 

 

 

वह घर का सारा काम अपनी सास कुमुद से करने के लिए कहती थी। एक दिन कुमुद बाजार जाने वाली थी। उसने अपनी बहू रजनी से कहा, “तुम भी हमारे साथ बाजार चलो और तुम्हे जो भी चाहिए वहां चलकर खरीद लेना।”

 

 

 

 

रजनी बोली, “मैं धूप में नहीं जाऊंगी क्योंकि इससे हमारे शरीर का रंग काला पड़ जाएगा। आप तो बाजार जा ही रही है तो हमारे लिए एक क्रीम लेते आना जिससे हमारे शरीर का रंग और चमकने लगेगा।”

 

 

 

 

कुमुद बाजार जाकर वापस आ गई थी। तभी रजनी ने अपनी सास से पूछा, “क्या आपने हमारी बताई हुई क्रीम लाई है ?”

 

 

 

 

 

कुमुद बोली, “मैं तुम्हारी बताई हुई क्रीम का नाम भूल गई थी। उसकी जगह पर दूसरी क्रीम लाई हूँ।”

 

 

 

 

तभी रजनी बोल पड़ी, “आप तो खुद सुंदर नहीं है इसलिए सुंदरता का महत्व नहीं समझ सकती है।”

 

 

 

 

एक दिन कुमुद ने अपनी बहू से कहा, “कल हमारी बहन गीता अपनी बहू के साथ यहां आने वाली है। उनके स्वागत का सारा प्रबंध तुम्हे ही करना होगा।”

 

 

 

 

दूसरे दिन कुमुद की बहन अपनी बहू प्रिया के साथ कुमुद के घर आ गई थी। कुमुद की बहू रजनी को अपने सजने सवरने से ही फुरसत नहीं थी तो वह गीता और प्रिया का स्वागत कैसे करती।

 

 

 

 

सारा काम खुद कुमुद ने ही किया। कुमुद जब अपनी बहन के साथ खाना खा रही थी तब रजनी सज-धज कर उन लोगो के पास आकर खड़ी हो गई।

 

 

 

 

कुमुद और गीता आपस में बातें कर रही थी। गीता बोली, “बहन खाना कितना अच्छा बना है क्या आपकी बहू रजनी ने बनाया है ?”

 

 

 

 

अरे नहीं गीता उसे तो अपनी सुंदरता निखारने के अलावा फुरसत ही नहीं मिलती तो वह खाना क्या बनाएगी। तभी गीता की बहू ने कहा, “तो क्या यह खाना आपने बनाया है मां जी ?”

 

 

 

 

कुमुद बोली, “हां बेटी यह खाना मैंने ही बनाया है। यह तो रोज का ही काम है।”

 

 

 

 

इतना सुनकर रजनी वहां से तुनककर चली गई। कुछ देर के बाद अपना दुःख दर्द अपनी बहन से कह सुनकर गीता वहां से अपनी बहू के साथ चली गई।

 

 

 

 

उसी समय रजनी वहां आकर कुमुद से कहने लगी, “आपने हमारी बेइज्जती गीता मौसी और उनकी बहू प्रिया के सामने कर दिया क्या मैं कभी खाना नहीं बनाती हूँ ?”

 

 

 

 

“ठीक है मैं अपनी गलती मानती हूँ। लेकिन तुम दो चार दिन के लिए गीता के घर चली जाओ और मैं उसकी बहू को अपने घर ले आती हूँ।” कुमुद ने बात को टालने की गरज से कहा।

 

 

 

 

अब प्रिया कुमुद के घर आ गई थी और रजनी गीता के घर चली गई थी। दो दिन में ही गीता रजनी से परेशान हो गई थी। यहां दो दिन के लिए ही सही कुमुद को बहुत ही सुकून का एहसास हुआ था।

 

 

 

 

तीसरे दिन गीता रजनी के साथ कुमुद के घर आकर बोली, “दीदी आप हमे हमारी बहू दे दीजिए और अपनी बहू ले लीजिए।”

 

 

 

 

गीता अपनी बहू प्रिया को लेकर जाने लगी। लेकिन जाते-जाते ही कहती गई, “शरीर की सुंदरता से कोई सुंदर नहीं होता उसे अपने व्यवहार को भी सुंदर बनाना चाहिए।”

 

 

 

 

उसी दिन से रजनी ने घर का सारा काम-काज संभाल लिया था। यह देखकर कुमुद बहुत खुश हो गई थी।

 

 

 

 

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