Inspirational Stories in Hindi For Students / सबसे कीमती चीज हिंदी कहानी

Inspirational Stories in Hindi For Students / सबसे कीमती चीज हिंदी कहानी

Inspirational Stories in Hindi मित्रों इस पोस्ट में Short Inspirational Stories in Hindi For Students की ११ कहानियां दी गयी हैं।  सभी Inspirational Stories in Hindi With Moral बहुत ही प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद हैं।  आप इसे जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

1 – मित्रों यह हमारा मानव जीवन अमूल्य है।  आप इसे बर्बाद ना करें।  वर्तमान की निराशा में अपने सुनहरे भविष्य को बर्बाद ना होने दें।  आज की Inspirational Stories इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

Inspirational Stories in Hindi Pdf 

 

 

 

 

 

एक बहुत नामी स्पीकर ने हाथ में  ५००  का नोट  लहराते हुए सेमीनार की शुरुआत करते हुए हाल में बैठे तमाम लोगों से पूछा, ” यह ५०० का नोट कौन लेना चाहता है ? “

 

 

 

 

कई हाथ उठने शुरू हो गए। उसके बाद स्पीकर ने कहा, ” यह नोट मैं आपमें से किसी एक को दूंगा।  ” यह कहकर उसने नोट को मुट्ठी में बंद करके चिमोड़ना शुरू कर दिया।

 

 

 

 

प्रेरणादायक हिंदी कहानी 

 

 

 

 

 

बुरी तरह से चिमोड़ने के बाद उसने पूछा, ” बताइये, अब इस नोट को कौन लेना चाहेगा? ” अभी भी पहले की तरह ही हाथ उठाने लगे। इसके बाद उसने उस नोट को जमीन पर फेंका और उसे पैरों से कुचलने लगा।

 

 

 

 

उसके बाद उसने एक बार फिर से पूछा, ” यह नोट तो बिलकुल गन्दी हो गयी है।  क्या अभी भी इसे कोई लेना चाहेगा ? ” इस बार भी पहले की तरह ही हाथ उठे।

 

 

 

तब उसने लोगों को सम्बोधित करते हुए कहा, ” दोस्तों आज आप लोगों ने एक महत्वपूर्ण पाठ सीखा।  मैं इस नोट के साथ इतना कुछ किया, लेकिन फिर भी आप इसे लेना चाहते  थे।  क्यों ? क्योंकि इतना सब कुछ करने के बाद भी इस नोट की कीमत नहीं घटी। ”

 

 

 

उसके बाद उसने आगे कहा, ” उसी तरह हम जीवन में कई बार गिरते हैं, हारते हैं, हमें ऐसा लगाने लगता है कि अब हमारी कोई कीमत नहीं है, लेकिन आप ध्यान रखे आप अमूल्य हैं।  आपका कोई मोल नहीं हैं।  बीते हुए कल की निराशा में वर्तमान और भविष्य को बर्बाद ना करे।  आगे बढ़ें, नए हौसले के साथ।  याद रखें सबसे कीमती चीज आपका जीवन है। “

 

 

 

 

 

कल की चिंता ( Inspirational Stories in Hindi Pdf ) 

 

 

 

 

 

2- मित्रों कल की चिंता में आज क्यों बर्बाद कर रहे हो ? कल कभी आता, है क्या ? अगर आप आज को सुरक्षित कर लोगे तो कल अपने आप सुरक्षित हो जाएगा।  आज की यह प्रेरणादायक कहानी इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

एक बहुत बड़े साहूकार थे। एक दिन अचानक से उनकी मृत्यु हो गयी। एक उनके बेटे ने मुनीम जी से पूछा, ” काका हमारे पास कितनी संपत्ति है? “

 

 

 

 

इसपर मुनीम जी ने विचार किया की अभी यह सब जानने के लिए यह लड़का छोटा है, इससे इसके बारे में क्या बताया जाए। लेकिन उत्तर तो देना ही था, सो उन्होंने काफी सोच – विचार कर कहा, “ छोटे मालिक आपके पास इतना धन है कि आपकी आने वाली १० पीढ़ियां बैठकर खा सकती हैं।  “

 

 

 

 

यह सुनकर वह लड़का उदास रहने लगा।  उसने सोचा, ” हमारे पास १० पीढ़ियों तक का धन है मगर ११वीं  पीढ़ी क्या खायेगी ? ” उसकी चिंता बढ़ने लगी।

 

 

 

 

अपने सेठ को चिंतित देखकर एक दिन मुनीम जी ने उससे कहा , ” आप बहुत चिंतित रहने लगे हैं। आप एकादशी का व्रत रखो और द्वादशी के दिन ब्राह्मण को अन्नदान करो और इसके अतिरिक्त मंदिरों में कुछ दान करें।  आपकी चिंता छूमंतर हो जायेगी।

 

 

 

 

सेठ जी ने ऐसा ही किया।  वे मंदिरों में दान देने लगे।  उन्होंने उपवास रखा।  तीन दिन बाद एकादशी थी।  सेठ जी ने एकादशी का व्रत किया।  दान देने के दिन मुनीम जी ने कहा, ” आप ब्राह्मण को अपने हाथों से उनके घर पर जाकर दान दें। ”

 

 

 

 

सेठ जी मान गए और मुनीम जी के साथ ब्राह्मण के लियए अन्न ( सिद्धा ) लेकर ब्राह्मण के घर गए और ब्राह्मण से कहा, ” दान ले लीजिये। ” इसपर ब्राह्मण ने कहा, ” रुकिए, मैं भीतर ब्राह्मणी से पूछकर आता हूँ। ”

 

 

 

वह भीतर गए और ब्राह्मणी से बोले, ” आज का क्या प्रबंध है ? ” ब्राह्मणी ने कहा, ” आज का दान आ गया है। ” ब्राह्मण बाहर आये और सेठ से बोले, ” आज का दान आ गया है।  आप इसे किसी दूसरे ब्राह्मण को दे दीजिये। “

 

 

 

सेठ बड़े हैरान थे। उन्होंने ब्राह्मण से पूछा, ” आज का दान आ गया है तो क्या हुआ ? यह कल आपको काम देगा। ” इसपर ब्राह्मण ने कहा, ” जिसने आज का इंतज़ाम किया, वही कल भी करेगा। “

 

 

 

 

यह सुनते ही सेठ जी सोचने लगे, ” मुझे तो ११वीं पीढ़ी की चिंता है और इस ब्राह्मण को कल की भी चिंता नहीं। ” सेठ जी की आँख खुल गयी और उनकी चिंता भी दूर हो गयी और वे ख़ुशी – ख़ुशी लौट गए।

 

 

 

 

गौतम बुद्ध की शिक्षा ( Inspirational Stories in Hindi For Class 9 ) 

 

 

 

 

 

3- मित्रों Problems  हर किसी के Life में रहती है कोई इससे बच ही नहीं सकता है। आप अगर Poor हो तो भी समस्या होगी, Middle Family से हो तो भी समस्या है और Rich हो, तो भी Problems है। आप इससे भाग ही नहीं सकते . आज की यह Inspirational Story इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

 

 

एक आदमी अपनी Life की Problems से बहुत दुखी हो गया था। वह बड़ा परेशान रहने लगा। एक दिन उसके एक दोस्त ने उसे advise दी, कि वह Gautam Buddha के पास जाये। वह उसकी हर Problems का समाधान कर देंगे। वह आदमी  Gautam Buddha के पास गया। और अपनी सारी परेशानियां बताने लगा। गौतम बुद्ध कुछ नहीं बोले, सिर्फ उसकी Problems को सुनते रहे।

 

 

 

 

 

जब वह अपनी परेशानी बता दिया, तब गौतम बुद्ध ने कहा, “वत्स परेशानी तो हर किसी को होती है। अगर मानव जीवन पाये हो तो इससे लड़ना सीखो। परेशानियों से भागोगे तो और परेशान रहोगे। परेशानियां आज भी है कल भी थी और भविष्य में भी रहेगी। नाश हमारा होता है परेशानियों का नहीं। तुम्हे क्या लगता है कि सिर्फ तुम दुखी हो,नहीं सारा संसार दुखी है। किसी को कुछ परेशानी है तो किसी को कुछ। इसलिए खुद में बदलाव लाओ और लड़ो, परेशानियां अपने आप कम हो लगेंगी।” उस आदमी को बात समझ में आ गयी और अब वह ख़ुशी – ख़ुशी रहने लगा।

 

 

 

 

 

जो होता है अच्छा होता है Akbar Birbal Inspirational Stories Hindi 

 

 

 

 

4-मित्रों भगवान जो करता है वह अच्छा ही करता है। हमें लगता है कि यह  Wrong है, But वह Right होता है हम तब उस चीज को उस समय नहीं समझ पाते है, परन्तु हमें उसकी अहमियत तब समझ आती है जब वह हमारे लिए Helpfull साबित होती है। आज की यह कहानी इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

एक बार की बात है अकबर बीरबल जंगल से जा रहे थे। तभी अकबर के एक सैनिक के अंगूठे में चोट लगी। वह दर्द से चिल्लाने लगा। यह देख बीरबल ने कहा, जो होता है अच्छा होता है।”

 

 

 

 

बीरबल की यह बात अकबर को बहुत बुरी लगी। उन्होंने सिपाहियों को आदेश दिया, “बीरबल को ले जाओ और कारागृह में बंद कर दो।”

 

 

 

 

उसके बाद उस चोटिल सिपाही की मरहम पट्टी की गयी और वे आगे जंगल में आगे बढ़ गए। जंगल काफी घाना था। अचानक से वह चोटिल सिपाही बिछड़ गया और जंगल के मानव उसे पकड़ ले गए।

 

 

 

 

वहां उसे जगल की देवी के सामने उल्टा लटका दिया गया। वे उसे जंगल की देवी को अर्पित करना चाहते थे, तभी एक Jungle ke Manav ने देखा कि सिपाही का अंगूठा चोटिल था। यह देखकर उन्होंने उस सिपाही को अशुद्ध मानते हुए छोड़ दिया।

 

 

 

 

बेचारा वह चोटिल सिपाही किसी तरह से भटकते हुए अगले दिन राजदरबार में पहुंचा। वहां अकबर भी मौजूद थे। उन्होंने उससे प्रश्न किया, “कल तुम कहाँ गायब हो गए थे ? हमने तुम्हे कितना ढूंढा।”

 

 

 

 

यह सुनकर उस सिपाही ने पूरी कहानी बता दी और कहा, “बीरबल ने सही कहा था कि जो होता है अच्छा होता है।”

 

 

 

 

यह सुनते ही अकबर को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने बीरबल को छोड़ने का आदेश दे दिया। बीरबल के दरबार में आने के बाद अकबर ने उन्हें पूरी बात बताते हुए कहा, “हमसे गलती हो गयी तुम्हे जेल में बहुत कष्ट हुआ होगा ?”

 

 

 

 

इसपर बीरबल ने कहा, “महाराज ! जो होता है, अच्छा होता है अगर मैं जेल नहीं आता तो वे जंगली आदमी  मुझे पकड़ लेते, क्योंकि मेरा घोड़ा इस सिपाही के साथ ही चल रहा था।”

 

 

 

 

अकबर यह सुनकर बहुत खुश हुए और वे भी मानने लगे कि भगवान जो कुछ भी करता है अच्छे के लिए ही करता है।

 

 

 

 

 

किशोर की सीख 

 

 

 

 

 

5 – मित्रों हमें हमेशा ही अपने आज को सुरक्षित करना चाहिए, अगर आपने आज को सुरक्षित कर लिया तो कल अपने – आप सुरक्षित हो जाएगा।  पढ़ें यह खूबसूरत हिंदी प्रेरक कहानी। 

 

 

 

 

प्रभु दयाल के चार लड़के थे। लड़के बड़े हो चुके थे। प्रभु दयाल के पास खुद की गाड़ी यानी मूलभूत सभी सुविधा थी। उनके बच्चे भी कमा रहे थे। लेकिन प्रभु दयाल की पेंशन ही इतनी थी कि छः सात आदमी का भरण-पोषण आराम से हो जाता था।

 

 

 

 

 

एक दिन सुखवीर जो प्रभु दयाल का रिश्ते में भाई था। उसने प्रभु दयाल के छोटे लड़के किशोर से पूछा, “तुम्हारे पिता के पास इतना पैसा तो होगा ही कि तुम लोग आराम से रह सको।  “

 

 

 

 

 

किशोर ने उत्तर दिया, “चाचा जी, भरे हुए कुए से हमेशा पानी निकालने से वह एक दिन सूख जाएगा जिस कारण से प्यासा ही रहना होगा। इसलिए हम अभी से एक-एक लोटा पानी लाने का प्रयास कर रहे है। जिससे पानी लाने की आदत भी बनी रहेगी और हमारी प्यास भी बुझ जाएगी।”

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – वर्तमान को सुरक्षित रखने से ही भविष्य सुरक्षित रहेगा।

 

 

 

 

Best Inspirational Stories in Hindi

 

 

 

 

6 – मित्रों जब हम आगे बढ़ने की Try करते है, तो यह Society हमें पीछे करने की कोशिस करती है। हमें Demotivate करती है। लेकिन एक बात हमेशा ध्यान रखो आगे वही बढ़ा है, जिसने society की care नहीं की है और जब आप आगे निकल जाओगे तब यही society आपसे सीखने की बात करेगी। आज की यह Inspirational story इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

 

बहुत समय पहले की बात है। एक तालाब के किनारे ढेर सारे मेंढक रहते थे। उसी तालाब के मध्य में एक खंभा था। मेढको ने तय किया जो भी इस खंभे पर सबसे पहले चढ़ेगा उसे king घोषित किया जाएगा। यह बात अगल-बगल के मेढको तक पहुंचा दी गई। बहुत सारे मेढको ने इसका विरोध किया।

 

 

 

 

 

उनका कहना था कि यह बेकार का खेल है। निश्चित समय पर खेल शुरू हुआ। वहां ढेर सारे मेढक आ गये। वे एक-एक करके उस Pol पर चढ़ने लगे।

 

 

 

 

 

Pol चिकना होने के कारण वे उस पर चढ़ नहीं पाते और कुछ दूर जाने पर गिर जाते। यह देखकर विरोध कर रहे मेढको में ख़ुशी की लहर छा गई। वे अब मेढको को Demotivate करने लगे।

 

 

 

 

 

जैसे ही कोई मेढक चढ़ने की Try करता वे चिल्लाने लगते, “अरे क्यूँ बेकार की Hard Work  कर रहे हो। आगे नहीं बढ़ पाओगे ” और जैसे ही कोई मेढक नीचे गिरता वे खूब जोर से हँसते। धीरे-धीरे मेढको का उत्साह कम होने लगा वे हार मानने लगे। अंत में केवल तीन मेढक शेष रह गए और कुछ समय बाद सिर्फ एक।अकेला मेढक pol पर चढ़ने लगा।

 

 

 

 

 

इधर से मेढक चिल्लाते, “क्यों मेहनत कर रहे हो ? देखो सभी हार गये। तुम भी हार मान जाओगे।” लेकिन वह मेढक चढ़ता रहा वह गिरता फिर चढ़ता, फिर गिरता फिर चढ़ता और अंत में अपनी मंजिल पर पहुंच गया। यह देखते ही वहां तालियां बजने लगी। अब Demotivate करने वाले भी इस जश्न में शामिल हो गए।

 

 

 

 

 

जब वह मेढक नीचे उतरा तो उससे एक मेढक ने पूछा, ” आपमें इतनी positive energy कहां से आयी।” यह सुनकर पीछे से एक मेढक बोला, “इससे क्या पूछते हो ? यह तो बहरा है।” मित्रों आगे बढ़ना है तो हमें इस मेढक की तरह society की बातों को अनसुना करना ही होगा।

 

 

 

 

देवी माँ हिंदी प्रेरणादायक कहानी

 

 

 

 

 

7 – मैं एक छोटे से गांव में रहती हूँ जहां अभी भी आवागमन का साधन सुलभ नहीं है। कही भी आवागमन करने के लिए सिर्फ ट्रेन का ही सहारा लेना पड़ता है।

 

 

 

 

हमारे गांव में पिछड़ेपन की हर निशानी मौजूद है।  ना ही School ना ही Hospitals….. इन सब सेवाओं के लिए दूर जाना पड़ता है। जिसमे श्रम तो होता ही है समय का भी अपव्यय होता है।

 

 

 

 

गांव के लोग ट्रेन,  चाहे कोई भी हो, उसे रोकने में पूर्ण रुप से उस्ताद है। हमारे गांव में ट्रेन मार्ग बहुत पहले से है लेकिन सड़क मार्ग का दर्शन दुर्लभ है।

 

 

 

 

 

स्टेशन से एक किलोमीटर की दूरी पर देवी मंदिर है। लेकिन मंदिर जाने के लिए भी हमें ट्रेन की पटरियों के किनारे से ही जाना पड़ता है,  यानि कि ट्रेन के नाम से ना टूटने वाली दोस्ती है।

 

 

 

 

 

हमारे गांव में देवी मैया की बड़ी ही मान्यता है। कोई भी शुभ कार्य  उनके दर्शन के बिना अधूरा समझा जाता है। ऐसा इसलिए है कि जब भी कोई विपदा आती है तो देवी मैया का ही आसरा शेष रहता है। कितनी भी बाढ़ आ जाए लेकिन देवी मैया के स्थान के साथ आस पास का हिस्सा कभी नहीं डूबता।

 

 

 

 

आज मैं जो कुछ भी हूँ मैया के कारण।  मैं ३५ साल की हो चुकी हूँ और मैं गांव में रहकर भी १०वीं तक की परीक्षा  माता के कारण ही पूरी कर सकी, इसलिए मैया का महत्व मेरे लिए और बढ़ जाता है।

 

 

 

 

मैं विधायक साहब से मिलने जा रही हूँ जिससे उनके प्रयास से हमारे गांव में स्कूल खुल सके और गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने का प्रयास हो।

 

 

 

 

 

कर्जा लेकर पिताजी ने भाइयों का मुंडन संस्कार कराया और भाइयों को नए – नए कपड़े मिल गए थे। पिताजी ने कहा था कर्जा चुकाकर तुम्हे भी नए कपड़े ले देंगे, लेकिन मैं जानती थी बिना फ्रॉक फ़टे मुझे नया कपड़ा नहीं मिलेगा।

 

 

 

 

देवी मंदिर में भाइयों के मुंडन संस्कार के समय एक औरत पूजा कर रही थी सबसे साफ सुथरी और लम्बी सी। माँ कह रही थी बिलकुल देवी मैया की तरह दिख रही थी।

 

 

 

 

मुंडन संस्कार के बाद हम लोग स्टेशन पर आ गए  और वह औरत भी स्टेशन पर आकर एक बेंच पर बैठ गई।  पिताजी रात्रि के भोजन के लिए सामान लाने चले गए। वह स्टेशन ही हमारा बाजार था और फिर नाव से ही गांव की वापसी संभव थी।

 

 

 

 

 

मैं माँ के मना करने के बाद भी उस औरत के बगल में बैठ गई ताकी मैं पता लगा सकूं कि क्या यह  सच में ही देवी मैया है?  वो चाय पी रही थी। मुझे अपने बगल में बैठा देख उन्होंने पूछा, ”  चाय पिओगी ? “

 

 

 

 

 

मैंने सहमति से सर झुका लिया, क्योकि आज बिना मांगे चाय मिल रही थी।  चाय के साथ उन्होंने मुझे बिस्किट भी दिया।  मैं आश्चर्यचकित थी। मैं सोच रही थी, ”  कि कौन है वो ? “

 

 

 

 

 

वह हमारी भाषा में बात भी कर रही थी। वह हमसे पूछा, ”  पढ़ाई करती हो ? ” मैंने कहा, ”  गांव में पांचवी के बाद स्कूल ही नहीं है और हमारे पिताजी के पास इतना पैसा कहाँ है कि वह मुझे आगे की शिक्षा दिलवा सके? हम लोग गरीब है इसलिए आगे की पढ़ाई मुश्किल है, लेकिन फिर भी हमने १० वीं तक पढ़ाई की। ” हमारे वार्तालाप के बीच पिताजी बाजार से वापस आ गए।

 

 

 

 

 

मैं उनके बारे में जानना चाहती थी क्योकि माँ ने कहा था कि वह देवी मैया जैसी दिखती है। इसलिए मैंने उनसे पूछा, ”  क्या आप देवी मैया हो ? ” उन्होंने कुछ नहीं कहा सिर्फ मुस्कुरा कर रह गई।

 

 

 

 

 

पिताजी हम लोगो को लेकर गांव जाने की तैयारी में थे। तभी वह बोल पड़ी, ” हमारी ट्रेन आने वाली है, आप हमें ट्रेन में बिठा कर जाना।” पिताजी भी उनके प्रभाव में आ गए, क्योकि उन्होंने वहां मौजूद सभी बच्चो को खाने के सामान के साथ – साथ पंद्रह – पंद्रह रुपए भी दिए। वह पिताजी से बातें करने लगी।

 

 

 

 

 

इतने में ट्रेन आ गई और वो उसमे बैठ गई। ट्रेन जब चलने लगी तो उन्होंने पिताजी को एक कागज का पैकेट दिया और बोली, ” यह माता का प्रसाद है। ”

 

 

 

 

 

ट्रेन जाने के पश्चात् पिताजी ने वह पैकेट खोला तो उसमे चमकते हुए दो स्वर्ण कंगन थे और एक कागज का टुकड़ा। पढ़ने पर ज्ञात हुआ कि देवी मैया ने कहा था, ”  यह कंगन बेचकर कर्जा चुकाओ और बेटी को पढ़ाओ वह जहां तक पढ़ना चाहे और बाकी बचे पैसे सेअपना स्वरोजगार करो। यह देवी मैया की इच्छा है और आदेश भी। ”

 

 

 

 

 

यह देखकर आस पास के लोग कहने लगे, ”  वह जरूर देवी मैया थी,  नहीं तो कौन इस तरह किसी को सोने का कंगन देता है। ” मैं गांव की प्रथम बालिका थी जिसने बगल वाले गांव में जाकर १० वीं की पढाई की थी और अच्छे नम्बरो से उत्तीर्ण भी हुई थी।

 

 

 

 

 

उसके बाद ट्रेन से शहर में जाकर Bachelor of Arts तक की शिक्षा हाशिल की। ऐसा नहीं कि हमारी पढाई के दौरान कोई बाधा नहीं आई, लेकिन वह देवी मैया की आज्ञा के सामने टिक नहीं पाई ।

 

 

 

 

 

मेरी पढाई पूर्ण होने के उपरांत गांव में ही मुझे शिक्षिका का उत्तरदायित्व मिला। मुझे मालूम था कि शिक्षा के बिना जिंदगी अपूर्ण है। मैंने तैयारी के साथ मंदिर में देवी की पूजा अर्चना की और फिर देवी माँ से कहा, “मैं जब भी ट्रेन में बैठती हूँ आपका चेहरा ढूंढने की कोशिस करती हूँ आप हमें फिर से मिल जाना।” मैया सिर्फ मुस्कुरा रही थी।

 

 

 

 

 

मैं शहर पहुंची और विधायक साहब के सचिव के घर के  बाहर लगी हुई Bell को बजाई। कुछ समय बाद एक महिला ने दरवाजा खोला मैं आश्चर्य चकित हो उसका चेहरा देखती ही रह गई। मेरी देवी मैया मेरे सामने खड़ी थी।

 

 

 

 

मैं उनके चरणों में गिर पड़ी और कहा, “आपने मुझे स्टेशन पर जब कंगन को प्रसाद के रुप में दिया था। तब से ही मैं आपको ढूंढ रही हूँ। आपकी अनुकम्पा से मैंने बी.ए. कर लिया है।”

 

 

 

 

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वह मुझे अंदर ले गई और कहने लगी, “मैंने तुम्हारे अंदर पढ़ने की ललक देखी थी और उस ललक को पूर्ण करने के लिए हमारा प्रयास सार्थक हुआ।”

 

 

 

 

मैंने पूछा, ”  देवी आप कौन है ? ” उन्होंने कहा, ”  एक साधारण औरत हूँ । “

 

 

 

 

फिर मैंने कहा, ” लेकिन आप तो हमारी भाषा बोल रही है।” इसपर उन्होंने हँसते  हुए कहा, ” हमारे पिताजी वहा  स्टेशन मास्टर थे। उनके साथ रहने के कारण मैंने तुम्हारी भाषा सीख लिया था। इसलिए मैं तुम्हारी भाषा में बात कर सकती हूँ।”

 

 

 

 

 

फिर उस औरत ने कहा, “मैं उस जगह को पूरी तरह जानती हूँ। एक बार मैं वहां देवी मैया के दर्शन के लिए गई थी और देवी मैया से प्रार्थना किया कि हमारी नौकरी लगने पर मैं आपके दर्शन अवश्य करुँगी। मैं दो बेटियों के जन्म देने की सजा पा रही थी। माता की कृपा से मुझे अच्छी नौकरी मिल गई। इसलिए मैं  वहां देवी दर्शन के लिए गई थी।”

 

 

 

 

 

इसपर मैंने पूछा, “क्या आपके घर वाले कंगन के बारे में नहीं पूछे ?”

 

 

 

 

औरत ने पुनः कहा, “मैं दो बेटियों के कारण मार खा रही थी और तीसरी के लिए मार खाने के लिए पहले से ही तैयार थी, लेकिन नौकरी से मुझे बहुत सम्बल  मिला, किसी ने पूछा ही नहीं कंगन के बारे में। क्योकि अब मैं उन लोगो के लिए कुबेर का खजाना बन गई थी। अच्छा तुम यहाँ आने का प्रयोजन बताओ ? ”

 

 

 

 

 

मैं आपके दर्शन करना चाहती थी। मैंने इतना ही कहा तब तक उन्होंने हमारी फाईल को उठाई और पढ़ने लगी। पढ़ने के बाद उन्होंने कहा अपने गांव में  हाईस्कूल खुलवाना चाहती हो। जल्द ही तुम्हारे स्कूल का काया पलट होने वाला है।

 

 

 

 

 

जहाँ तुम जैसी होनहार बेटीयाँ हो वहां शिक्षा की ज्योति को जलने से कौन रोक सकता है और सरकार भी गांव के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और जल्दी ही हर बच्चे तक शिक्षा की ज्योति पहुंचेगी और सड़क का कार्य भी शीघ्रता से पूर्ण होगा। थोड़ी देर में तुम विधायक जी से मिल लेना।

 

 

 

 

 

मैं कि किंकर्तव्यविमूढ़ बैठी थी। वह दो कप चाय और नाश्ता ले आई और बोली, ”  नाश्ता कर लो और चाय पीओ और हां हमें देवी मैया बनने का सुझाव तुम्ही ने दिया था। मैं सिर्फ देवी मैया के जैसी दिखती हूँ लेकिन मैं देवी मैया नहीं हूँ। ” वह कहे जा रही थी।

 

 

 

 

 

प्रत्येक नारी के अंदर देवी का स्वरुप विराजमान रहता है और तुम्हारे अंदर भी वह देवी स्वरुप है जो अपना सुख भूलकर गांव के विकास के लिए अनवरत प्रयास कर रही है।

 

 

 

 

 

8 – मित्रों विवाद बहुत ही बुरी चीज है।  आप हमेशा इससे बच कर रहें।  आप पूरी Try करें कि विवाद का समाधान तुरंत ही हो जाए।  आज की Inspirational Story  इसी पर आधारित है।

 

 

 

 

कुछ बच्चे आपस में खेल रहे थे। लगभग सभी बच्चे 8 से 10 वर्ष के थे। खेल – खेल में ही उन लोगों का झगड़ा हो गया और बात हाथा पाई तक पहुँच गई। मनोहर लाल उधर से ही जा रहे थे।

 

 

 

 

 

बच्चो झगड़ते देख उन्होंने उन लोगों को दूर किया और समझाने वाले अंदाज में बोले, “हम लोग जब तुम्हारी उम्र के थे तब आपस में खेलते समय कभी विवाद ही नहीं करते थे। जानते हो क्यूं ?”

 

 

 

 

 

बच्चों ने पूछा, ” Why ?”

 

 

 

 

इसपर मनोहर लाल ने कहा, “हमारा तरीका अलग था हम लोग जीतने पर भी सामने वाले को एक मौका देते कि वह हमें हरा सके, लेकिन आक्रोशित होने के कारण पुनः उसकी हार हो जाती। फैसला फिर पहले की तरह साफ हो जाता था और दूसरा पक्ष लज्जित भी हो जाता था।” इस तरह के प्रयास से मेल भी बना रहता था और खेल भी चालू रहता था।

 

 

 

बच्चे मनोहर लाल से बहुत Inspire हुए और उन्होंने भी वही किया और फिर मनोहर लाल की यह Idea उनके खेल का हिस्सा बन गया।

 

 

 

 

Moral Of This Story- खेल में विवाद के लिए स्थान नहीं होना चाहिए।

 

 

 

 

 

खिलाड़ी चूहा Inspirational Stories in Hindi Reading 

 

 

9- मित्रों हर पल सतर्क रहना चाहिए।  आप अगर सतर्क रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे।  आज की कहानी में चूहे से आपको यही सीख मिलेगी कि आप कुछ भी करते रहें, परन्तु सतर्क रहें। 

 

 

 

 

 

रामू पढ़ाई कर रहा था। कमरे में पूरी तरह सन्नाटा था। एक छोटी सी बॉल कमरे में पड़ी थी, जिसे रामू उपयोग में नहीं लाता था। आज वही बॉल रामू के ख़ुशी का कारण थी।

 

 

 

 

एक छोटा चूहा उस बॉल के ऊपर बैठने का प्रयास करता था और इस प्रयास में वह हर बार जमीन पर गिर जाता था, क्योंकि चूहा जब भी बैठने का प्रयास करता बॉल थोड़ा आगे खिसक जाती और उसका प्रयास असफल हो जाता था।

 

 

 

 

 

एक बिल्ली अपने लक्ष्य को साधने का प्रयास कर रही थी। चूहे ने फिर अपना प्रयास चालू किया चूहे के इस कार्य में बॉल उछलकर बिल्ली के सामने जा गिरी, जिससे बिल्ली हड़बड़ा उठी। तभी उसकी नजर बिल्ली के ऊपर पड़ी और चूहा भी नौ-दो ग्यारह हो गया। उस बॉल की वजह से चूहा बच गया।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – खेल हो या जंग हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए।

 

 

 

 

सबका साथ Inspirational Stories in Hindi

 

 

 

 

10 – सबको साथ लेकर चलने की कला हर किसी के बस की बात नहीं है।जो सबको साथ लेकर चलता है, वह अवश्य ही हर कार्य में Success रहता है। आज की यह Inspirational Story इसी पर आधारित है। 

 

 

 

 

 

एक दिन उसके पास एक धनवान सेठ अपना जूता सिलवाने आया, उस व्यक्ति को ‘जो हाथ और गले में स्वर्ण आभूषणों से सज्जित था ‘ देख कर सोच में पड़ गया और अपना कार्य भी अच्छे ढंग से कर रहा था। क्या सोच रहे हो भाई ? धनवान सेठ ने कैलाश से पूछा।

 

 

 

 

मोची ने कहा, “आप इतने बड़े आदमी होकर इस जूते का साथ नहीं छोड़ रहे है, जबकि कई जूते खरीदने में समर्थ है।” उस धनवान सेठ को कैलाश की बातों का अर्थ मालूम हो गया था। उसने दूसरे दिन कैलाश को अपनी साड़ी की कंपनी में कार्य संभालने का प्रस्ताव दिया।

 

 

 

 

 

एक दिन कैलाश मोहन सेठ के साथ बैठकर व्यापर के बारे में कुछ वार्तालाप कर रहा था। तभी उसकी नजर ऑफिस में लगे एक फ्रेम के ऊपर गई, जिसमे ‘ शिव भगवान का परिवार के साथ का चित्र लगा हुआ था ‘ उसे देखकर कैलाश ने सेठ मोहन से पूछा, “क्या आपने इस शिव परिवार के ऊपर कभी गौर किया है ?”

 

 

 

 

 

मोहन सेठ ने कहा, “मैंने इस पवन चित्र पर कभी गौर ही नहीं किया।” शिव जी के ऊपर जटाओ ने गंगा जी को रोक रखा है, जो पानी का प्रतीक है। शिव जी का तीसरा नेत्र जो अग्नि का प्रतीक है। पानी और आग एक साथ है। जटाओं में चन्द्रमा जो अमृत का प्रतीक है गले में भुजंग जो विष का प्रतीक है। वह दोनों भी शंकर जी के सानिध्य में रह रहे है। ” मोहन सेठ कैलाश  की बातों को सुन रहे थे।

 

 

 

 

 

कार्तिकेय का वाहन मयूर है, जिसकी जन्मजात शत्रुता भुजंग से है। माता पार्वती की गोंद में प्रथमेश मौजूद है। जिनका वाहन मूषक है,जिसका दुश्मन भुजंग है और तो और जगत जननी माँ पार्वती का वाहन शेर और जगत पिता शंकर का वाहन वृषभ है, जो एक दूसरे के स्वभाव के अनुकूल नहीं है, लेकिन शंकर जी सानिध्य में सब एक दूसरे के साथ रह रहे है।

 

 

 

 

 

शंकर जी अपने परिवार को चलाने के लिए कितना अच्छा तारतम्य बना रखा है। शंकर जी इस दुनिया के सामने व्यवस्थापक के रूप में एक Examples है।

 

 

 

 

 

कैलाश की बातों को सुनकर मोहन सेठ ने अपनी कम्पनी की व्यवस्था कैलाश को सौंप दी। यह कहते हुए कि जो आदमी एक ‘ फोटो ‘ में इतनी खूबियां देख सकता है। उसकी व्यवस्था भी उत्तम होगी।

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – जो सबके साथ सामंजस्य बिठा लेता है वही निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता जाता है।

 

 

 

 

 

विश्वास Inspirational Stories in Hindi Written 

 

 

 

 

11 – सामान वहीं रखना चाहिए जहां पर जगह खाली हो। सामान के ऊपर सामान रखने से ऊपरी सामान गिरने का डर अधिक होता है। खाली घड़ा ही पानी ग्रहण कर सकता है। भरा हुआ घड़े में पानी बाहर गिर जाता है।

 

 

 

 

महेश गुरु के आश्रम में चार शिष्य शिक्षा ग्रहण कर रहे थे और पांचवा शिष्य मोहन शिक्षा ग्रहण तो करता था लेकिन भूल जाता था। मोहन अपने गुरु का बहुत ही आज्ञाकारी शिष्य था। गुरु जी प्रायः मनोरंजन के लिए ही हर कार्य मोहन को सौंप देते थे।

 

 

 

 

 

भूलने की आदत के कारण गुरु का और अन्य शिष्यों का मनोरंजन तो होता ही था। आज्ञाकारी होने के कारण मोहन प्रायः कठिनतम  कार्य भी कर लेता था। जो अन्य शिष्यों के बस की बात नहीं थी।

 

 

 

 

एक दिन गुरु जी मोहन को बुलाकर कहा, “बेटा मोहन तुम्हे नदी के उस पार राधेश्याम के यहां हमारा संदेश पहुंचाना है। उनसे कहना है, कि गुरु जी ने आपको मिलने के लिए बुलाया है।” मोहन गुरु जी आज्ञा लेकर राधेश्याम के यहां जाने का उपक्रम किया। मोहन के जाने के कुछ समय बाद गुरु जी ने अपने दो शिष्यों को मोहन के पीछे लगा दिया कि कोई कठिनाई आने पर उसकी सहायता कर सके।

 

 

 

 

मोहन को तैरना आता था। लेकिन पूर्ण रूप से नहीं। फिर भी वह गुरु की आज्ञा सर्वोपरि मान कर नदी के तट पर पहुँच गया। मोहन ने खुद संकल्प किया- मुझे गुरु जी की आज्ञा का पालन करना ही होगा और वह पानी में उतर गया। गुरु जी के दोनों शिष्य यह सब छुप कर देख रहे थे।

 

 

 

 

मोहन को जैसे आभास हुआ कि पानी के अंदर उसे कोई तैरने में सहायता कर रहा है और वह बहुत ही आराम से नदी पार कर गया, और जाकर राधेश्याम को गुरु जी की आज्ञा सुना दी। कुछ क्षण के उपरांत वह आश्रम के लिए प्रस्थान किया। इसबार भी मोहन तैरने का प्रयास और संकल्प शक्ति के सहारे नदी पार कर आश्रम सकुशल लौट आया।

 

 

 

 

 

दोनों शिष्य जो मोहन की सहायता के लिए गए थे। उन्होंने मोहन की कुशलता का वर्णन किया। फिर गुरु जी ने स्वयं मोहन से प्रश्न किया, “बेटा मोहन यह सब कैसे संभव हुआ ?”

 

 

 

 

 

मोहन ने कहा, “आप हमारे साथ थे इसलिए यह कार्य सम्पन्न हो सका। नदी के भीतर आपने ही हमें सहारा दिया था और मैं तैरने के प्रयास से सफल होकर आपका आदेश पूर्ण कर सका।”

 

 

 

 

 

 

Moral Of This Story – विश्वास और प्रयास से कठिनाइयों को पार किया जा सकता है।

 

 

 

 

 

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